1577 को प्रशिक्षण 522 को ही मिल सका रोजगार...

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 12:14 AM IST
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जौनपुर। युवाओं का कौशल निखार कर उन्हें रोजगार दिलाने में मदद करने के दावे तो खूब हुए, लेकिन इसे धरातल पर उतारने में जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं। जिले में योजना का बुरा हाल है। पिछले चार वर्षों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 1577 लोगों को विभिन्न व्यवसाय और सेवा के लिए प्रशिक्षण दिया गया, इसमें 522 को ही रोजगार मिल सका। शेष 1055 लोग यहां-वहां भटकने के बाद रोजगार न मिलने से मायूस हैं। जिम्मेदार इसके लिए उनकी आर्थिक स्थिति को रोड़ा बता रहे हैं।
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बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकार ने युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की पहल की थी। इसके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का संचालन किया गया। इसके तहत सेल्फ इंप्लाइज टेलर फील्ड टेक्निशियन, रिटेल, डाटा आपरेेटर, कंप्यूटर, रिटेल टीम लीडर आदि विभिन्न प्रकार के कोर्स का प्रशिक्षण देकर लोगों को रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले चार सालों में कुल 1577 लोगों को विभिन्न कोर्स का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें 824 पुरुष और 793 महिलाएं शामिल हैं। इस दौरान सेल्फ इंप्लाइज टेलर में 92 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसी प्रकार फील्ड टेक्निशियन व रिटेल में 273, डाटा आपरेटर में 1024, रिटेल टीम लीडर में 224 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। जिसमें से 522 लोग रोजगारी बन गए हैं। जिसमें सेल्फ इंप्लाइज टेलर में 21, फील्ड टेक्निशियन में 190, डाटा ऑपरेटर में 268, रिटेल टीम लीडर में 53 लोगों ने अपना रोजगार शुरू कर दिया है, लेकिन अभी भी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 1055 लोग रोजगारी नहीं बन पाए हैं।
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प्रशिक्षण के बाद सिलाई से सशक्त हो रही बेटियां
योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाली महिला अभ्यर्थियों में ज्यादातर ने सिलाई के माध्यम से खुद को आत्मनिर्भर बनाया है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण ने उनके सपने को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। वंदना विश्वकर्मा ने बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सिर्फ 12वीं तक ही पढ़ सकी। पीएम कौशल विकास योजना के तहत तीन माह का सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर अब घर पर ही लोगों के कपड़ों की सिलाई कर करीब सात हजार रुपये प्रति माह की कमाई कर रही हूं। अंजली ने बताया कि बीएम की पढ़ाई के बाद सेल्फ टेलर कोर्स किया। कपड़ा सिलकर प्रति माह करीब छह हजार तक की कमाई हो जा रही है। ममता देवी के मुताबिक कंप्यूटर व सिलाई के प्रशिक्षण के बाद घर पर ही महिलाओं को सिलाई सिखाने के साथ ही लोगों के कपड़ों की सिलाई भी कर रही हूं। पहले किसी तरह एक सिलाई मशीन लेकर काम शुरू किया। अब आत्मनिर्भर हूं। नेहा गुप्ता भी घर पर ही कपड़ो की सिलाई कर अपना खर्च निकाल रही हैं।
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वर्जन...
जो लोग प्रशिक्षण प्राप्त करने के बुाद अभी तक रोजगारी नहीं बन पाए हैं, उन्हें रोजगार मेले के माध्यम से रोजगार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। कोरोना काल के चलते इसका आयोजन नहीं हो पाया था। शीघ्र ही वृहद स्तर पर रोजगार मेला आयोजित होगा। - राजीव सिंह, जिला सेवा योजन अधिकारी
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