पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह के गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:21 PM IST
सिकरारा बरईपार मार्ग से कलवारी गांव को जोड़ने वाली सड़क की बदहाल स्थिति। संवाद
सिकरारा बरईपार मार्ग से कलवारी गांव को जोड़ने वाली सड़क की बदहाल स्थिति। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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सिकरारा। पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह के पैतृक गांव कलवारी के बारे में सोचते ही ऐसे इलाके की छवि बनती है जहां बुनियादी सुविधाएं मुकम्मल हों । सड़क, बिजली, पानी जैसी चीजों के लिए ग्रामीणों को परेशान ना होना पड़े। देश को डॉ. लालजी सिंह जैसा अनमोल रत्न देने वाले जो कि भारत में डीएनए फिंगर प्रिंट का जनक माने जाते हैं के गांव वाले कम से कम इतने के तो हकदार हैं ही। लेकिन इस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है कि कलवारी में सड़क, पेयजल के साथ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं के लिए भी लोग मोहताज हैं। और तो और गांव की कई बस्तियों में शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से लोग खुले में शौच जाने के लिए बाध्य हैं।
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जनपद मुख्यालय से 18 किमी. दूर सिकरारा विकास खंड के कलवारी गांव की आबादी 3500 है। राजपूत, ब्राह्मण, दलित व अन्य पिछड़ा वर्ग बहुल ज्यादातर बस्तियों में रास्ते तक का अभाव है। सिकरारा बरईपार मार्ग से गांव में जाने वाली एकमात्र सड़क की जर्जर स्थिति से लोगों को आने-जाने में कठिनाई होती है। ब्राह्मण बस्ती में तो पहुंचने के लिए पुराने चकरोड का ही सहारा है। दलित बस्ती के एक पुरवे में कोई रास्ता ही नहीं है। वहां के 10 परिवार आज भी पगडंडी से घर पहुंचते हैं। आधी से अधिक दलित बस्ती शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। इन बस्तियों के लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। गांव में शुद्ध पानी की व्यवस्था भी नहीं है। दलित बस्ती में इंडिया मार्का टू हैंडपंप न होने के कारण लोग छह नंबर हैंडपंप से पेयजल लातेे हैं। गांव में स्वास्थ्य कर्मियों का कोई अपना कार्यालय नहीं है। टीकाकरण पल्स पोलियो अभियान संचालित करने के लिए अभी तक कोई एएनएम सेंटर अथवा आंगनबाड़ी केंद्र तक स्थापित नहीं है। समय-समय पर गांव के किसी के दरवाजे पर टीकाकरण का कार्यक्रम संचालित होता हैं। हालांकि गांव में प्राथमिक व इंटर कॉलेज के साथ-साथ डॉ. लालजी सिंह द्वारा स्थापित पीजी कॉलेज व पंजाब नेशनल बैंक की सुविधा जरूर है ।

गांव के जरूरतमंदों के घर शौचालय, संपर्क मार्ग, टूटी हुई सड़क की मरम्मत और पेयजल के लिए कई कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रस्ताव ब्लाक के अधिकारियों को दिया गया है। बजट मिलते ही अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। - जवाहरलाल गौतम, ग्राम प्रधान, कलवारी।
जीनोम फाउंडेशन प्रयोगशाला की गतिविधियां ठप
सिकरारा। डॉ. लालजी सिंह ग्रामीण क्षेत्र में सस्ती व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कितने सजग थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मनुष्य में होने वाली जेनेटिक बीमारियों के निदान व इलाज के लिए देश में ग्रामीण क्षेत्र की पहली प्रयोगशाला जीनोम फाउंडेशन की स्थापना की। इसका मुख्यालय हैदराबाद में आज भी सक्रिय है। बीएचयू में कुलपति रहते हुए उन्होंने बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई। कुशल व विशेषज्ञ चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देने लगे थे। 100 बेड का एक अस्पताल भी फाउंडेशन के पास स्थापित करना उनकी योजना में था। दुर्भाग्य से दिसंबर 2017 में उनके निधन से यहां की गतिविधियां धीरे-धीरे ठप हो गई। इन दिनों लाखों की मशीनें बेकार पड़ी हैं। उक्त केंद्र के साइंटिस्ट इंचार्ज डॉ. आशीष सिंह बताते हैं कि उनके बड़े पिता डॉ. लालजी सिंह लोगों को आनुवांशिक रोगों से बचाने तक की जुगत कर चुके थे। उन्होंने इसके लिए देश में सबसे पहले जीनोम डाटा कुंडली का सिद्धांत दिया था। इसका पता चलते ही बच्चे को उस रोग से बचाव की तैयारी पहले से ही कर दी जाती है। उनके निधन के बाद मानव जीवन को बचाने वाले इस अहम कार्य पर ब्रेक लग गया। हैदराबाद स्थित मुख्य केंद्र से कलवारी केंद्र को किसी भी तरह का सहयोग नहीं मिल रहा है।

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