डीसीबी खाताधारकों को एक और झटका

Jaunpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
जौनपुर। जिला कोआपरेटिव बैंक के करीब सवा लाख खाता धारकों को एक और झटका लगा है। बैजनाथन कमेटी की सिफारिशों के तहत डीसीबी को मिलने वाली छह करोड़ की रकम फिलहाल रोक दी गई है। वजह बताई गई कि डीसीबी के पास आरबीआई का लाइसेंस नहीं है। आरबीआई से लाइसेंस के लिए डीसीबी को सीआरआर और सीएलआर गारंटी जमा करनी होगी। जब तक बैंक के कुल जमानुपात की रकम आरबीआई के पास गिरवी नहीं रखी जाएगी तब तक आरबीआई लाइसेंस जारी नहीं करेगा। आरबीआई से लाइसेंस नहीं मिलेगा तो बैजनाथम कमेटी की सिफारिशों के तहत बैंक को जारी धनराशि का भुगतान नहीं होगा। बैजनाथन कमेटी की सिफारिशों के तहत डीसीबी को छह करोड़ रुपये जारी किए गए थे। लाइसेंस नहीं होने के कारण यह पैसा उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक ने अपने पास सुरक्षित कर लिया था। छह करोड़ की एफडी करा दी गई थी। सरकार बदली तो प्राथमिकताएं बदल गईं। पता चला है कि डीसीबी के लिए आवंटित छह करोड़ से प्रदेश सरकार ने आरबीआई के पास जमा कर दूसरे बैंकों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस प्रक्रिया में जौनपुर डीसीबी शामिल नहीं है। करीब सवा लाख बैंक उपभोक्ताओं को अभी पैसों के लिए और इंतजार करना होगा।
जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) में लंबे समय से लेनदेन बंद है। बैंक कर्मचारी सुबह दफ्तर आते हैं और घर चले जाते हैं। ऋण के रूप में बांटी गई रकम वसूली जाती है और उसी से बैंक के खर्चे चल रहे है। बैंक सूत्रों के मुताबिक हर महीने करीब तीस लाख रुपये वेतन भत्ते के रूप में चले जाते हैं। कोआपरेटिव बैंकों की माली हालत सुधारने बैजनाथन कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने बैंकों की माली हालत सुधारने के लिए आर्थिक पैकेज देने की सिफारिश की थी। इसी के तहत डीसीबी को पहली किश्त के तौर पर छह करोड़ रुपये केंद्र सरकार से जारी किए गए। शर्त यह भी थी कि बैजनाथन कमेटी का पैसा उन्हीं बैंकों को दिया जाए जिनके पास आरबीआई का लाइसेंस हो। डीसीबी के पास अभी तक आरबीआई का लाइसेंस नहीं था। लाइसेंस लेने से पहले सीआरआर (कैश रिजर्व रेसियो) की रकम आरबीआई के पास गिरवी रखनी होती है। ऐसा नहीं है कि आरबीआई का लाइसेंस केवल जौनपुर डीसीबी के पास नहीं था। प्रदेश के 25 डीसीबी के पास लाइसेंस नहीं थे। सरकार बदली तो प्राथमिकताएं भी बदल गईं। नई सरकार ने 25 में से 16 बैंकों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया शुरू कर दी। सीआरआर के तौर पर आरबीआई के पास गिरवी रखी जाने वाली रकम का भी इंतजाम कर लिया। बैजनाथन कमेटी से आई रकम भी दूसरे बैंकों में खपा दी। जौनपुर डीसीबी इसमें शामिल नहीं है। ऐसे में साफ है कि करीब सवा लाख उपभोक्ताओं को अभी और अभी इंतजार करना होगा।


वर्जन :
फिलहाल जौनपुर को अभी राहत नहीं मिलने वाली है। वह पैसा भी डीसीबी को नहीं मिलेगा जो बैजनाथन कमेटी के तहत जारी किया गया था। आरबीआई से लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में जौनपुर शामिल नहीं है। - पाणिनि सिंह, चेयरमैन, कोआपरेटिव बैंक

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