ज्योतिषी हत्याकांड: माफिया की ओर इशारा

Jaunpur Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
सुइथाकला (जौनपुर)। ज्योतिषी रमेश तिवारी उर्फ गुरुजी हत्याकांड में पुलिस ‘माफिया थ्योरी’ पर ही काम कर रही है। संभावना यही है कि पुलिस जब भी प्रकरण का पटाक्षेप करेगी पूरे मामले को ठेके विवाद से लेकर गंवई विवाद में समाहित कर देगी। मामला हाईप्रोफाइल होने के नाते मर्डर को भी हाईप्रोफाइल रणनीति से जोड़ा जा रहा है। माफिया के धमकाने की बात तो पुलिस कह रही है लेकिन अभी तक धमकाए जाने के पक्के सुबूत हाथ नहीं लगे। केवल जुबानी ही कहा जा रहा है कि ज्योतिषी की ओर से एक माफिया ने धमकी दी थी। वहीं दूसरे माफिया को धीरेंद्र सिंह से जोड़ने की कोशिश कर रही है। इस ‘माफिया थ्योरी’ में पुलिस के हाथ मौजूदा समय में कोई साक्ष्य नहीं है। शेर बहादुर उर्फ शेरू कुख्यात और पेशेवर अपराधी है। उसकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। इन सबके बीच घटना के चश्मदीद राजेश तिवारी के बयान की सबसे अहम भूमिका है। राजेश कम से कम घटना में शामिल रहे दोनों शूटरों के हुलिया तो बता ही सकते हैं।
पुलिस के प्रारंभिक खुलासे में भी कई पेच फंस रहे हैं। पुलिस एक माफिया को ज्योतिषी रमेश तिवारी का खास बता कर विरोधियों को धमकाने की थ्योरी पर काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर दूसरे माफिया को ज्योतिषी के करीबियों का खास बताने की कोशिश कर रही है। इस थ्योरी में कई सवाल फंस रहे हैं। पहला पुलिस के पास ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं कि दोनों माफियाओं ने किसी को धमकाया हो। केवल जबानी ही कहानी गढ़ी जा रही है। हालांकि यह भी हो सकता है कि पुलिस के पास धमकाने के साक्ष्य हों लेकिन ऐसा संभव नहीं। इस नाते कि दोनों माफिया ऊंचे खिलाड़ी हैं। वह धमकाने जैसी गलती कभी नहीं करते। गीदड़ भभकी चाहे दे दें या फिर अपने कारिंदों से बात पहुंचा दे लेकिन सीधे तौर पर कभी नहीं टकराते। संभावना यही है कि घटना के पीछे पीडब्ल्यूडी, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के ठेकों का विवाद हो लेकिन ठेके इतने बड़े नहीं थे कि माफिया को खुंरेजी पर उतरना पड़े। वहीं गंवई विवाद भी इतना गहरा नहीं था कि दिन दहाड़े हत्या कर दी जाए या फिर करवा दी जाए। पुलिस सूत्रों के जरिए दूसरा शूटर विपुल सिंह था। विपुल भी अंबेडकर नगर का शातिर है और शेरू के साथ कई घटनाओं में शामिल रहा है। संभावना है कि शेरू ने विपुल के साथ मिलकर हत्या की हो लेकिन शूटरों को ठेका देने वाले चेहरों का खुलना जरूरी है। यह तभी होगा जब शेरू अपने दूसरे शूटर के साथ पकड़ा जाएगा। एक और को लपेटने की कोशिश हो रही है। यह सरपतहां थाने का हिस्ट्रीशीटर रहा है और लखनऊ में रीयल इस्टेट कारोबार से जुड़ा है। हालांकि यह गुरुजी के भी करीब रहा। फिर भी एसटीएफ इसे भी संदेह के नजरों से देख रही है।

शूटरों के पीछे लगी एसटीएफ
सुइथाकला (जौनपुर)। मामले की विवेचना में सहयोग कर रही एसटीएफ लगातार शूटरों के पीछे लगी हुई है। साजिशकर्ताओं के बयान के आधार पर शूटरों की खोज की जा रही है। पुलिस ने एयरपोर्ट पर अभी अपने पहरे बिठा दिए हैं। संभावना है कि हत्या की साजिश में शामिल एक विदेश का भी रुख कर सकता है। इस नाते घेराबंदी तेज की गई है। शनिवार की रात एसटीएफ और पुलिस ने कादीपुर कोतवाली के दो गांवों में छापेमारी की लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। पुलिस को पक्की सूचना थी कि यहां कुछ लोग ठहरे हैं लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। अंत में यही कहा गया कि पहुंचने से पहले ही लोग भाग गए। दोनों गांवों का नाम सुरक्षा कारणों से फिलहाल नहीं खोला जा रहा है।

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