57 लाख का प्रोजेक्ट 3.25 करोड़ खर्च

Jaunpur Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में नौ वर्ष से बन रहा छात्र सुविधा केंद्र अभी भी अधूरा है। अब तक 3.25 करोड़ खर्च हो चुके हैं लेकिन कार्यदायी संस्था ने विवि को हैंडओवर नहीं किया। नौ वर्ष पहले इसकी निर्माण लागत 57.11 लाख थी और लगातार प्रयोग के चलते 339.97 लाख हो गई। कार्यदायी संस्था ने 3.25 करोड़ खर्च भी कर दिए लेकिन विवि के काम का भवन तैयार नहीं हो पाया। शायद कार्यदायी संस्था निर्माण लागत फिर बढ़ाने की तैयारी में है। उधर, प्रधान महालेखाकार (प्रिंसपल एकाउंट जनरल) पीएजी ने विवि से 19 सवालों के जवाब मांगे हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो यह प्रकरण सीएजी (कैग) को स्थानांतरित किया जा सकता है।
बता दें कि पूर्व कुलपति नरेश चंद्र गौतम के कार्यकाल में विवि के प्रशासनिक भवन में छात्र सुविधा केंद्र के नाम पर एक भवन का निर्माण शुरू हुआ था। उस दौरान छात्र सुविधा केंद्र की निर्माण लागत 57.11 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंप दी गई। काम भी शुरू हो गया और कुछ कमरे भी बन गए। बीच में आए कुछ कुलपतियों ने प्रयोग भी किए। किसी ने कमरों की संख्या बढ़ा दी तो किसी ने एक फ्लोर का प्रस्ताव पेश कर दिया। नतीजतन भवन निर्माण में देरी होती गई। उधर, महंगाई का हवाला देते हुए कार्यदायी संस्था ने भी कई बार प्रोजेक्ट बदले। अपने संबंधों के जरिए विवि से प्रोजेक्ट सेंक्शन भी करा लिए। मौजूदा समय में छात्र सुविधा केंद्र की निर्माण लागत 339.97 लाख पहुंच गई। इसमें से कार्यदायी संस्था ने 325 लाख रुपये खर्च कर दिए। हालत यह है कि पूरा भवन कबूतरखाना बना हुआ है। छात्र सुविधा केंद्र में अभी भी फिनिशिंग और फर्नीचर के काम बाकी है। बाहर जंगली घासों का डेरा होने के नाते कहीं से नहीं लगता कि विवि का कैंपस है। इस बीच कैंपस स्थित पीएनबी की विस्तार पटल शाखा को जरूर छात्र सुविधा केंद्र स्थानांतरित कर दिया गया। पीएनबी ने अपने मतलब के स्थान को साफ सुथरा किया। बाकी पूरा भवन बगैर इस्तेमाल किए ही जर्जर हालत में पहुंच गया। विवि की बाह्य आडिट के दौरान यह प्रकरण उठा था। ऐसी स्थिति पर प्रधान महालेखाकार (पीएजी) ने आपत्ति जताई है। पीएजी ने पूछा है कि किन परिस्थितियों में 3.25 करोड़ खर्च हो गए और भवन निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया। पीएजी ने भवन निर्माण स्वीकृति का प्रस्ताव, वित्तीय प्रशासनिक स्वीकृति के आदेश की प्रति, छात्र सुविधा केंद्र के लिए धन कहां-कहां से आया, भवन का शुरुआती इस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति किसने दी, टेंडर की प्रतियां, कार्यदायी संस्था को काम सौंपने के आदेश की प्रति भी मांगी है। इसके अलावा कार्यदायी संस्था से अनुबंध की प्रति, धन के व्यय और उपभोग प्रमाणपत्र, कार्य शुरू करने की तिथि, कार्य बंद होने के कारण, भवन का क्या इस्तेमाल हो रहा है, निर्माण लागत 57.11 लाख से 339.97 लाख कैसे हुई जैसे 19 सवाल पूछे हैं। जवाब तो 26 अक्तूबर तक मांगा था लेकिन विवि अभी तक तैयार नहीं कर पाया। यही सवाल विवि के अफसरों के गले की हड्डी बन सकता है। वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीएजी जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो प्रकरण सीएजी को स्थानांतरित किया जा सकता है। यदि कैग ने जांच की तो भवन निर्माण के दौरान हुई अनियमितता की कलई खुल जाएगी।

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