हेडमास्टर को अगवा करने की कोशिश

Jaunpur Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
मड़ियाहूं। कस्बे के मिर्दहा मोहल्ले से मदरसा हेडमास्टर अजरा तसनीम को बाइक सवारों ने अगवा करने की कोशिश की। शिक्षिका गलियों से भागती हुई सड़क पर पहुंच कर हल्ला मचायी। शोर मचाने पर बाइक सवार भाग निकले। कोतवाली में दी गई तहरीर में अजरा ने एसटीएफ या फिर एटीएस पर साजिश के तहत फर्जी मुकदमे की आशंका जताई है। यह भी कहा है कि जिस तरह उसके देवर खालिद मुहाजिद को उठा कर फर्जी मुकदमे में फंसाया गया उसी तरह उसे भी उठाने की कोशिश की गई। पुलिस ने अजरा की कहानी को मनगढंत बताया है।
कस्बे के महतवाना मोहल्ला निवासी मो. शाहिद जमाल की पत्नी अजरा तसनीम मिर्दहा मोहल्ला स्थित जामियातुल शालेहात में हेडमास्टर हैं। अजरा का कहना है कि बुधवार सुबह नौ बजे वे मदरसा जा रहीं थीं कि मिर्दहा मोहल्ले की मस्जिद से कुछ दूरी पर हेलमेट लगाए बाइक सवार दो लोग खड़े थे। उसे देखते ही बाइक सवारों ने उसेक देवर खालिद मुजाहिद का नाम लेते हुए कहा कि उसकी भाभी ही जा रही है। इतना सुनते ही अजरा तेज रफ्तार होते हुए कस्बे की ओर भागी। समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होते हुए वे करीब एक किलोमीटर दूर स्वामी विवेकानंद इंटर कालेज के सामने पहुंच गई। यहां सड़क किनारे स्थित हैंडपंप पर अहमदुपर गांव की दो महिलाएं पानी भर रही थी। अजरा ने जब बताया कि दो मोटरसाइकिल सवार उसके पीछे लगे हुए हैं तो महिलाओं ने हल्ला मचाया। इसके बाद बाइक सवार भाग निकले। महिला भागती हुई सड़क किनारे स्थित अरविंद यादव के बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर पहुंची। अरविंद यादव ने फोन कर उसके पति शाहिद को सूचना दी। कुछ ही देर में उसके पति शाहिद जमाल भी पहुंच गए। घटना की जानकारी लेने के बाद पत्नी अजरा को लेकर वे कोतवाली पहुंचे। कोतवाली में दी गई तहरीर में अजरा ने आरोप लगाया है कि एसटीएफ या फिर एटीएस उसे फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश कर रही है। चार वर्ष पहले उसके देवर के साथ ऐसा हुआ था। अजरा ने बताया कि पांच दिन पहले मंदिर के चबूतरे पर दो लोग बैठे थे। इन लोगों ने कहा कि यही लड़की खालिद के घर की है। इस नाते वह उसी दिन से चौकन्ना रह रही थी। अजरा के ससुर जहीर आलम फलाही का कहना है कि खालिद मुजाहिद को उठाने से पहले भी उसके घर रेकी की गई थी। कुछ लोग दरी बेंचने के बहाने उसके घर आए थे। उसकी गिरफ्तारी के वक्त भी दरी बेंचने वाला व्यक्ति दिखा था। कोतवाल शिवानंद यादव का कहना है कि अजरा की कहानी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। वह जिस रास्ते से भागने की बात बता रही है उधर तो खेत है। अजरा को भागते हुए किसी ने नहीं देखा। वह घर की या फिर मदरसे की ओर भागने के बजाय विपरीत दिशा की ओर क्यों भागी।
बता दें कि 23 नवंबर 2007 को बनारस, फैजाबाद, लखनऊ कचहरियों में हुए सीरियल विस्फोट के बाद 22 दिसंबर 2007 को मड़ियाहूं के खालिद मुजाहिद तथा आजमगढ़ के तारिक काजमी को पुलिस ने विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार किया था। तभी से दोनों जेल में हैं। खालिद के चाचा जहीर आलम फलाही का आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियों ने खालिद को 16 दिसंबर 2007 की शाम छह बजे के करीब कस्बे के सदरगंज मोहल्ला स्थित एक चाट की दुकान से उठाया था। बाद में उसकी गिरफ्तारी बाराबंकी से दिखाई गई। अब उसकी बहू के साथ भी कुछ ऐसी ही साजिश रची जा रही है।

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