आधी रात में भागो, भागो की लगी गुहार

Jaunpur Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
शाहगंज। शनिवार की आधी रात के बाद कस्बे में मची भगदड़ ने सनसनी फैला दी। लोग खुद तो भागे जा रहे थे लोगों को भी घर छोड़ने की सलाह दे रहे थे। एक दूसरे की देखादेखी पूरा मोहल्ला घर छोड़ भाग निकला। ज्यादातर लोग खांस रहे थे और आंखों की जलन से परेशान थे। नींद में होने के नाते किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसे में क्या करें। घर छोड़ खुले मैदान में भागना ही लोगों ने बेहतर समझा। गैस रिसाव इतना जबरदस्त था कि पूरी नई आबादी में भगदड़ मच गई। सभी कपड़े से मुंह ढंके हुए थे। चेहरे पर अजीब सी दहशत थी। कुछ पढ़े लिखे लोग 1984 के भोपाल यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी की कहानी सुनाकर लोगों को और भयभीत कर रहे थे। करीब साढ़े तीन बजे गैस का दबाव कमजोर पड़ा। चार बजे के बीच फायर सर्विस के जवानों ने भरोसा दिलाया कि लोग अपने घरों को लौटे। लोग घरों को तो लौटे लेकिन नींद किसी को नहीं आई। दूसरे दिन रविवार को भी लोगों में दहशत देखी गई।
आधी रात की भगदड़ में शामिल रहे नई आबादी के शिशु कुमार यादव, अनवार अहमद, डा. बदरुद्दीन, अनुपम सरकार, डा. सर्फुद्दीन, डीके यादव, अनिल मोदनवाल, विनय मोदनवाल, डा. हमीद, डा. जुबेर अहमद, गुफरान अहमद, सुरेश अग्रहरि, प्यारे लाल श्रीवास्तव, वेद प्रकाश यादव, इमरान अहमद, फूलचंद्र वर्मा, एसबी पांडेय, एजाज अहमद का कहना है कि ऐसा लग रहा था जैसे दम घुट जाएगा। आंख खोलने पर जलन हो रही थी। मुंह खोलने पर उल्टी महसूस हो रही थी। ऐसी स्थिति में घर छोड़ना ही बेहतर साबित हुआ। खुर्शीद अहमद कहते हैं कि बेचैनी होने लगी। सांस फूलने लगी और ऊबकाई महसूस होने लगी। आंख से पानी गिरने लगा तो परिवार के लोगों को साथ लेकर रामलीला मैदान की ओर भागे। अब्दुल जब्बार कहते हैं कि सिर दर्द, चक्कर तथा उल्टी की शिकायत पर घर छोड़ना पड़ा। अशफाक अहमद कहते हैं कि ऐसा लगा जैसे कयामत आने वाली है। लोग भागे जा रहे थे। हमने भी सो रहे बच्चों को जगाया और लोगों के पीछे भाग निकले। मो. आशिफ ने कहा कि भारी घुटन के चलते घर छोड़ना पड़ा। मो. आलिम का कहना है कि वह तो जान बचाकर भाग निकले लेकिन जब भोर में घर लौटे तो दो बकरियां मर चुकी थीं। महिला बुद्धन कहती हैं कि इतनी दहशत कभी नहीं देखी। हर कोई बच्चों का हाथ पकड़े भागा ही जा रहा था। यह भी नहीं बता रहा था कि क्यों भाग रहे हैं। जब लोग खुले मैदान में मिले तो पता चला कि आलू स्टोर में गैस का टैंकर फट गया है। ऐसे ही हालात भोर तक बने रहे।

इनसेट :
ऐसे हुई दिक्कत
- ऐसा लग रहा था जैसे दम घुट जाएगा।
- आंख खोलने पर जलन हो रही थी।
- मुंह खोलने पर उल्टी महसूस हो रही थी।
- सांस फूलने लगी और ऊबकाई महसूस होने लगी।

वर्जन :
आंखों को लगातार साफ पानी से तब तक धोते रहे जब तक जलन खत्म न हो जाए। आंखों को मसलने से बचे। लगातार रगड़ने से घाव हो सकता है। आंखों से अधिक समय तक पानी निकलने से रोशनी प्रभावित हो सकती है। लुब्रीकेटिंग आई ड्राप का इस्तेमाल करें। - डा. एनके सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ।

वर्जन:
अमोनिया गैस की प्रकृति हाइड्रोस्कोपिक है। पानी के संपर्क में आते ही घुलकर अमोनिया हाइड्राक्साइड बना देती है। आंख और नाक तो सीधे तौर पर प्रभावित करती है। घुटन भी काफी महसूस होगी। क्षारीय होने के कारण शरीर को नुकसान पहुंचाती है। अधिक समय तक अमोनिया के संपर्क में रहने से मौत तो नहीं होती लेकिन शरीर के अंग प्रभावित हो सकते हैं। - प्रो. वीबी सिंह, बायोकेेमेस्ट्री विशेषज्ञ।

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