33 घंटे बाद दफन किया गया शव

Jaunpur Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
बरईपार। मछलीशहर के बरहता गांव में कब्रिस्तान के विवाद को लेकर एक वृद्ध का शव 33 घंटे बाद एसडीएम के पहल पर दफन किया गया। परिवार के लोग विवादित जमीन पर शव दफनाने को लेकर अड़े हुए थे। परिजन जिस जमीन पर शव दफनाना चाहते थे उस पर कोर्ट से स्टे जारी है। बुधवार की देर शाम एसडीएम राजेंद्र कुमार की पहल पर कब्रिस्तान में ही शव दफन किया गया।
बरहता गांव निवासी नूर मोहम्मद (60) की लंबी बीमारी के बाद मंगलवार दिन में 11 बजे मौत हो गई। नूर मोहम्मद पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और उन्होंने शादी नहीं की थी। नूर मोहम्मद अपने दो भतीजे आलम और अब्बास के साथ रहते थे। नूर मोहम्मद की मौत होने पर आलम, अब्बास ने घर के बगल स्थित विवादित जमीन पर शव दफनाना चाहा। इसकी भनक लगने पर पड़ोस के सीता राम यादव ने आपत्ति जताई। सीता राम का कहना है कि उक्त जमीन उनकी है। गलती से उस पर कब्रिस्तान का नाम चढ़ा दिया गया है। सीता राम की अपील पर सिविल कोर्ट द्वारा उक्त जमीन पर स्थगन आदेश जारी हुआ। पुलिस के मुताबिक कोर्ट के फैसले में यह भी कहा गया कि सीता राम पहले की तरह उक्त जमीन पर खेती कर सकते हैं लेकिन किसी तरह का निर्माण नहीं होगा। विवादित जमीन को लेकर मुकदमा दर्ज कराने वालों में नूर मोहम्मद का परिवार भी शामिल है। शव दफनाए जाने को लेकर विवाद की जानकारी होने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। आलम, अब्बास से गांव के दूसरे कब्रिस्तान में शव दफनाने को कहा लेकिन वे राजी नहीं हुए। परिवार वालों का कहना था कि उनके घर के बगल की जमीन कब्रिस्तान के नाम है। ऐसे में वह 500 मीटर दूर स्थित कब्रिस्तान में शव दफनाने नहीं जाएंगे। इधर, स्टे जारी होने के नाते पुलिस भी मामला सुलझाने में हलाकान रही। नूर मोहम्मद का शव बुधवार दिन भर घर पर रखा रहा। सुरक्षा के मद्देनजर गांव में पुलिस तैनात रही। सुबह मछलीशहर के प्रभारी कोतवाल केके सिंह, कानूनगो फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मृतक के परिवार वालों को समझाने का काफी प्रयास किया लेकिन परिजन अपनी बात पर अड़े थेे। कानूनगो का कहना था कि कोर्ट से स्टे लगा होने के नाते विवादित जमीन की नापजोख नहीं कराई जा सकती। आलम और अब्बास ने जिला मुख्यालय पहुंच कर एडीएम पीके उपाध्याय को मामले की जानकारी दी। शाम को एसडीएम राजेंद्र कुमार, सीओ मछलीशहर बृज मोहन, तहसीलदार राजेश कुमार भी मौके पर पहुंचे। सात बजे तक नूर मोहम्मद का शव घर में ही रहा। रात करीब आठ बजे एसडीएम राजेंद्र कुमार की पहल पर कब्रिस्तान में दफनाने की तैयारी शुरू हो गई थी।

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