गरीबी से बालिका की मौत

Jaunpur Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
मछलीशहर। गरीबी और खाने के संकट के चलते खरैया मऊ गांव में एक बालिका की मौत हो गई। भोजन के नाम पर कभी चावल तो कभी सूखी रोटी ही परिवार को नसीब होती है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि बालिका की मौत बासी चावल खाने से हुई है लेकिन उसके घर में खाने को एक दाना भी नहीं था। गुरुवार सुबह बच्ची की मौत के बाद पड़ोस के मदनमोहन मिश्र के घर से चावल मिला तो बीमार बच्चे की खिचड़ी का इंतजाम हो पाया। गांव के आठ लोगों ने लिखित तौर पर आरोप लगाया है कि बच्ची की मौत भूख से हुई है। उधर, प्रशासन का कहना है कि लड़की की मौत डायरिया से हुई है। उसका एक भाई बीमार भी चल रहा है। लड़की की मां ने बताया कि उसके घर में तीन किलो गेहूं था। उसे तीस रुपये में बेचकर बेटे की दवा के लिए अस्पताल गई थी।
खरैया मऊ गांव निवासी मुकुंद लाल मुंबई में दिहाड़ी मजदूरी करता है। मुकुंद की पत्नी अनीता का कहना है कि शराब आदि की लत होने के नाते पति घर का ध्यान नहीं रखता। अनीता अपनी बच्ची कोमल (08), बेटा अंकित (12), सत्येंद्र (10), सुनील (चार), अनिल (2) के साथ रहती है। घर की हालत बहुत खराब है। गरीबी को देखते हुए उसे अंत्योदय राशन कार्ड मिलता है लेकिन कार्ड पर मिलने वाले राशन से उसके परिवार का गुजारा नहीं चल रहा। अनीता का कहना है कि राशन दुकान से मिलने वाले चावल और गेहूं से जैसे तैसे पेट भरता है। अनीता का बेटा अनिल इन दिनों बीमार था। अनीता बच्चे को लेकर दो दिनों से अस्पताल में थी। गुरुवार को घर में कुछ नहीं था। बुधवार की शाम को चावल बना था। वही चावल खाकर अनिल और कोमल स्कूल गई थीं। स्कूल में कोमल को उल्टियां हुईं और घर लौटी तो मौत हो गई। बेटे को अस्पताल से लेकर जब अनीता घर लौटी तो कोमल विस्तर पर मृत पाई गई। जानकारी होने पर सीएचसी प्रभारी डा. आरके यादव अपनी टीम के साथ शुक्रवार दोपहर गांव पहुंचे। गांव वालों ने लिखित तौर पर डाक्टर को बताया कि कोमल की मौत गरीबी के कारण भुखमरी से हुई है। लिखित पत्र पर डाक्टर आरके यादव, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक प्रवीण कुमार पांडेय, संतोष कुमार के साथ राज कुमार, संतोष मिश्र, शंकर सिंह, दिनेश यादव, लालचंद्र शर्मा, रवि मिश्रा, पंकज कुमार, रोहित कुमार के हस्ताक्षर हैं। भूख से मौत का जब हल्ला मचा तो शाम करीब सात बजे एसडीएम राजेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे। महिला के घर की हालत देख वह भी चकित रह गए। पालीथीन की झोपड़ी की दीवारें दरक गई है। पांच फीट की झोपड़ी में चार बच्चों के परिवार के साथ अनीता गुजारा करती है। एसडीएम ने यह तो माना कि अनीता काफी गरीबी के दौर से गुजर रही है लेकिन भूख से मौत से इनकार किया। एसडीएम ने बताया कि महिला को 50 किलो चावल, 50 किलो गेहूं उपलब्ध कराने का आदेश कोटेदार को दिया गया है। इसके अलावा इंदिरा आवास उपलब्ध कराने के लिए बीडीओ को चिट्ठी भेजी जा रही है। एडीएम पीके उपाध्याय ने कहा कि महिला को अंत्योदय कार्ड दिया गया है। गांव में डायरिया फैला है और कोमल की मौत डायरिया से हुई है।

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