135 शाखाओं के ताले नहीं खुले

Jaunpur Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर राष्ट्रीयकृत बैंकों की दो दिनी हड़ताल बुधवार से शुरू हो गई। पहले दिन जिले की 135 शाखाओं के ताले नहीं खुले। ग्रामीण बैंक की 90 शाखाओं में कामकाज सामान्य रहा लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों में लेन-देन पूरी तरह ठप रहा। तीन निजी बैंकों की शाखाओं का भी कामकाज प्रभावित रहा। बताया गया कि बैंक प्रबंधन ने निर्देश दिए थे कि यदि हड़ताल में शामिल यूनियन के लोग बैंक बंद कराएं तो कोई विरोध नहीं करें। इस नाते निजी बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हुआ। डीसीबी ब्रांचों में भी हड़ताल के चलते कामकाज प्रभावित रहा। ग्रामीण बैंक यूनियन ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स की हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है। फोरम के संयोजक आरपी सिंह ने कहा कि गुरुवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।
एसबीआई मेन ब्रांच और जेसीज स्थित यूनियन बैंक की शाखा के बाहर बैंक अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर केंद्रीय सरकार का तीखा विरोध किया। कहा गया कि सरकार बैंक विरोधी साजिश कर रही है। नई वित्तीय नीतियां बैंकिंग सेक्टर को बरबाद करने वाली हैं। सरकारी साजिश के तहत घाटे वाली ग्रामीण बैंक शाखाओं को बंद करके उन्हें समीप की शहरी अथवा अर्द्धशहरी शाखाओं में विलय करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। छोटी ब्रांचों में परिवर्तन कर वहां स्टाफ को हटाने से राष्ट्रीयकृत बैंक होने का उद्देश्य की खत्म हो जागा। ग्रामीण क्षेत्र में अधिक से अधिक शाखाएं खोलने तथा ग्रामीण सामाजिक आर्थिक उत्थान ही राष्ट्रीकरण का मुख्य उद्देश्य है। इस सरकारी साजिश को बैंक यूनियन कामयाब नहीं होने देंगी। यूनाइटेड फोरम आफ यूनियन्स के संयोजक कामरेड आरपी सिंह ने कहा कि अभी तक बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सेवा शर्तें इंडियन बैंक एसोसिएशन के साथ द्विपक्षीय वार्ता से तय की जाती थी लेकिन खंडेलवाल कमेटी की सिफारिशों से द्विपक्षीय समझौते ही खतरे में पड़ गए हैं। फोरम की मांग है कि खंडेलवाल कमेटी की रिपोर्ट रद की जाए। खंडेलवाल कमेटी ने बैंकों के लाभ के मुताबिक अलग-अलग सिफारिशें की हैं। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक बैंक स्टाफ के वेतन के दो हिस्से होंगे। पहले फिक्स पे तथा दूसरा वैरिएबुल पे। फिक्स पे कर्मचारियों को समान रूप से मिलेगा लेकिन वैरिएबुल पे कर्मचारियों की कार्यकुशलता एवं क्षमता के आधार पर तय होगा। इस तरह एक ही बैंक में एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारी, अधिकारी को दो तरह के वेतन भुगतान होंगे। खंडेलवाल रिपोर्ट अधिकारियों, कर्मचारियों के बीच फूट पैदा कर संगठनों को कमजोर करने की साजिश करने वाली है। राष्ट्र्ीयकृत बैंकों में विदेशी निवेशकों को वोटिंग राइट एक फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी तथा निजी बैंकों में 10 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने की तैयारी की जा रही है। वीआरएस वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को पेंशन विकल्प के साथ मृतक आश्रित को नकरी तथा स्टाफ की भर्ती की जाए। इन्हीं मुद्दों को लेकर 135 बैंक शाखाओं में पूरी तरह तालाबंदी रही। एसबीआई मेन ब्रांच में ही क्लीयिरिंग हाउस होने के नाते करीब 200 करोड़ की क्लीयिरंग ठप रही। विरोध में निशिकांत, सुभाष, एलएन, संजय पांडेय, मनोज सिंह आदि शामिल हुए।

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