प्रदेश में खाद्य सैंपलिंग ठप

Jaunpur Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। पिछले वर्ष प्रदेश में लागू खाद्य सुरक्षा कानून की धार एक वर्ष में ही कुंद पड़ गई। तकनीकी दिक्कतों के चलते खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग चार अगस्त से पूरे प्रदेश में ठप है। वजह बताई जा रही है कि फूड सिक्योरिटी एक्ट लागू होने के साथ एक वर्ष के भीतर विभागीय ढंचा खड़ा किया जाना था लेकिन शासन स्तर पर ही कोई फैसला नहीं हो पाया। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भेे
लिहाजा सैंपलिंग समेत दूसरे काम ठप करने पड़े। इस नाते कि जब तक व्यवस्था नहीं बदलती तब तक कानूनी तौर पर सैंपलिंग या फिर मिलावट के खिलाफ की गई कार्रवाई मान्य नहीं होगी। नतीजा यह निकला कि बाजार नियंत्रणमुक्त हो गया और मिलावटखोर फिर सक्रिय हो गए।
बता दें कि पांच अगस्त 2011 को प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया गया था। व्यवस्था थी कि एक वर्ष तक राज्य सरकार अस्थायी तौर पर मुख्य खाद्य निरीक्षक (सीएफआई) को अभिहित अधिकारी (डेजिग्नेटिव आफीसर) नामित कर काम चला सकती है। इस एक वर्ष में खाद्य सुरक्षा विभाग का पूरा ढांचा अलग करना होगा। पहले यह स्वास्थ्य विभाग के अधीन था और नए कानून के बाद डीएम के आधीन हो गया। यह भी तय था कि पचास फीसदी सीएफआई विभागीय प्रमोशन से अभिहित अधिकारी (डीओ) बनाए जाएंगे तथा पचास फीसदी पीसीएस से चयनित होकर आएंगे। विभाग का ढांचा नहीं खड़ा हो पाने और स्थायी अभिहित अधिकारी की तैनाती नहीं होने के कारण चार अगस्त से खाद्य सुरक्षा विभाग बेमतलब हो गया है। कानूनी तौर पर न तो कोई सैंपलिंग कर सकते है और न ही मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। पता चला है कि राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा ढांचा खड़ा करने के लिए केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय से एक वर्ष का मौका मांगा था लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब यह कानून अघोषित तौर पर स्थगित है।
खाद्य सुरक्षा विभाग डीएम के अधीन होने के बाद मिलावटखोरी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चला था। करीब 250 सैंपल लिए गए तथा 45 नमूने अधोमानक पाए जाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। काम इतनी तेजी से हुआ कि 20 मुकदमे निस्तारित भी कर दिए गए। खाद्य मुकदमों में एडीएम के अपीलीय अधिकारी होने के नाते मुकदमे भी जल्दी निस्तारित हुए। करीब आठ लाख रुपये जुर्माना भी ठोंका गया । विभागीय दावे के अुनसार 3.50 लाख बतौर जुर्माना वसूला भी गया। अब फूड सिक्योरिटी एक्ट में अभिहित अधिकारी (डीओ) को ही विधिक अधिकार दिए गए हैं जो कानूनी तौर पर न तो कोई मुकदमा दर्ज करा सकते है। ऐसे में अधोमानक खाद्य पदार्थ बेंचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। हालांकि कुछ अधिकारी दलील दे रहे हैं कि यदि पुराने शासनादेश की अवधि बीत गई तो नया शासनादेश भी तो जारी नही हुआ। इस नाते वह कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन नए आदेश की प्रतीक्षा में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। ऐसी स्थिति में मिलावटखोर राहत महसूस तक कर रहे हैं। अब तक डीओ का काम देख रहे सीएफआई वीपी सिंह का कहना है कि फिलहाल चार अगस्त के बाद कोई सैंपलिंग नहीं की गई। जौनपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में कहीं भी नहीं की गई। यदि सैंपलिंग की भी जाएगी तो वह वैधानिक तौर पर मान्य नहीं होगी। खाद्य सुरक्षा विभाग के प्रभारी एडीएम पीके उपाध्याय का कहना है कि फिलहाल शासन के अगले आदेश का इंतजार हो रहा है।

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