सियार के हमले से 17 जख्मी

Jaunpur Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
बदलापुर। सिंगरामऊ के जगदीशपुर गांव में रविवार रात सियार के हमले से 17 लोग जख्मी हो गए। सियार ने एक दर्जन मवेशी को भी काट कर घायल कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन पर तेंदुए ने हमला किया है। लोगों ने वन विभाग के अफ सरों को भी सूचना दी। गांव में वन विभाग की टीम पंहुच गई और तेंदुए की खोज शुरू की। काफी ढूंढन के बाद गांव में एक सियार मरा हुआ पाया गया। डीएफओ का कहना है कि ग्रामीण तेंदुआ नहीं सियार के हमले से घायल हुए हैं। हालाकि गांव के लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं। उन्हें अभी भी गांव में तेंदुए के मौजूदगी की आशंका है।
जगदीशपुर गांव निवासी किसान यूनियन के बदलापुर मंडल अध्यक्ष तिलकधारी (42) रविवार रात अपने घर के बाहर सोए थे। देर रात सियार ने तिलकधारी पर हमला कर दिया। तिलकधारी ने शोर मचाते हुए सियार को पकड़ने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। सियार के हमले से तिलकधारी के पूरे चेहरे पर गहरे जख्म हो गए। इसी गांव में घर के बाहर सो रहे लालचंद (28), शिव शंकर (42), प्रियंका (12), कन्हैया (60), समर नाथ (42), जगन्नाथ (65), प्रेमा (50), धमानी (55), विकास (14), सफीक (65), जुबैदा (60), नजबुलनिशा (70) पर भी बारी-बारी से सियार ने हमला किया। सियार के हमले से एक साथ इतने लोगों के घायल होने से गांव में दहशत फैल गई। अंधेरा होने के नाते लोग सियार को ठीक से देख नहीं सके। हल्ला मचा कि गांव में तेंदुआ घुस आया है। जिस तरफ सियार को भागते देखा गया था लाठी, डंडा और टार्च लेकर उस ओर लोग दौड़ पड़े लेकिन सियार कहीं नजर नहीं आया। दहशत के चलते लोग अपने-अपने घरों में दुबक गए। बदलापुर से सटे प्रतापगढ़ के देवसरा थाना क्षेत्र के महड़ौरा गांव निवासी रेखा देवी (40), रोशनी (12), सभाजीत (30), गुडि़या (25) पर भी सियार ने हमला किया। दोनो गांवों में घर के बाहर बंधे दर्जन भर मवेशी भी सियार के हमले में घायल हुए। घायलों ने थाने पहुंच कर घटना की जानकारी दी। पुलिस ने सभी को सीएचसी ले जाकर उपचार कराया। डीएफओ एके सिंह का कहना है कि रविवार सुबह वन विभाग की टीम गांव में भेजी गई थी। गांव के एक कोने में सियार मरा हुआ पाया गया। किसी पशु के काटने पर सियार के शरीर में रैबीज फैल गया था। जिससे उसकी मौत हो गई। मृत सियार का पोस्टमार्टम कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मरे हुए सियार का आकार काफी छोटा है। जबकि उन पर तेंदुए के आकार के जानवर ने हमला किया था। उसका शरीर भी चितकबरा था।
बदलापुर सीएचसी प्रभारी डा. महेंद्र यादव ने बताया कि सभी जख्मी लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन दे दिया गया। सीएचसी पर पर्याप्त इंजेक्शन हैं। लोगों को एंटी रैबीज का कोर्स पूरा कर लेना चाहिए। पीडि़त तीसरे, सांतवें और14वें दिन एंटी रैबीज इंजेक्शन जरूर लगवा लें। आखिरी डोज 90 दिन पर दिया जाता है लेकिन ज्यातर लोग 14वें दिन का ही इंजेक्शन लगवाते हैं। घाव को साफ पानी से धोएं। पट्टी बांधने से परहेज करें। घाव धोने में लाइफब्याय साबुन का इस्तेमाल करें। घाव यदि गहरा है तो इलाज में लापरवाही न बरतें। सूखने वाली दवाएं लेते रहें। हालांकि इतनी जल्दी रैबीज डिटेक्ट नहीं किया जा सकता लेकिन यदि वन विभाग के लोग कह रहे हैं तो कोई लक्षण पाया गया होगा।
डा. टीएन मिश्र, सीएमओ।

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