शव दफनाने को लेकर तनाव

Jaunpur Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
बरईपार/मछलीशहर। मछलीशहर के बरहता गांव में शनिवार को एक नवजात का शव दफनाने को लेकर दो पक्षों में तनाव की स्थिति बन गई। शव लेकर आए लोग ग्राम समाज की जमीन पर अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे जिस पर गांव के लोगों को आपत्ति थी। पुलिस, प्रशासन के हस्तक्षेप से आठ घंटे बाद कब्रिस्तान में बच्ची का शव दफन हो सका। गांव की स्थिति पर रखने के लिए फोर्स तैनात कर दी गई है।
बरहता गांव निवासी इदरीश की पत्नी ने शुक्रवार रात एक बेटी को जन्म दिया। कुछ समय बाद बच्ची की मौत हो गई। शनिवार सुबह परिवार के लोग ग्राम समाज की जमीन पर सड़क किनारे शव दफनाने पहुंचे। खबर लगने पर गांव के सैकड़ों लोग जुट गए और ग्राम समाज की जमीन पर शव दफनाए जाने का विरोध करने लगे। ग्रामीणों का कहना था कि शव गांव के कब्रिस्तान में दफन किया जाए। जबकि इदरीस पक्ष का कहना था कि पहले भी ग्राम समाज की जमीन पर उनके पुरखों का शव दफन किया गया है इस नाते वह यहीं अंतिम संस्कार करेंगे। ग्रामीणों के साथ इदरीस पक्ष के दर्जनों लोग भी मौके पर जुट गए। बवाल बढ़ता देख कुछ लोगों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। दोपहर करीब एक बजे एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, सीओ रंजन सिंह, कोतवाल पुरुषोत्तम शरण, तहसीलदार राजेश कुमार के साथ बदलापुर, सुजानगंज, सिकरारा की फोर्स मौके पर पहुंच गई। एसडीएम ने इदरीस पक्ष को समझाया कि जब गांव में कब्रिस्तान है तो ग्राम समाज की जमीन पर शव दफनाने का कोई औचित्य नहीं है। इस पर इदरीस का कहना था कि कब्रिस्तान शियाओं का है। आज तक नट समुदाय के लोगों ने वहां शव नहीं दफनाया है। शाम करीब पांच बजे एएसपी ग्रामीण सुरेश्वर भी मौके पर पहुंच गए। काफी देर तक चली बातचीत के बाद शाम करीब छह बजे कब्रिस्तान में नवजात का शव दफनाया गया। इस संबंध में तहसीलदार राजेश कुमार का कहना है कि इदरीस का परिवार जिस जगह शव दफनाना चाह रहा था वह ग्राम सभा की बंजर खाते की जमीन है। उक्त जमीन से 300 मीटर दूर स्थित कब्रिस्तान को शियाओं का बता कर परिवार के लोग वहां शव दफनाने को तैयार नहीं थे। समझा बुझा कर कब्रिस्तान में शव दफन करवा दिया गया है। यह आश्वासन भी दिया गया है कि जल्द से जल्द जमीन चिन्हित कर नटों के लिए अलग से कब्रिस्तान की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल तनाव की स्थिति को देखते हुए गांव में क्विक एक्शन रिलीफ फोर्स तैनात है।

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