प्रमाणपत्रों के गोरखधंधे में दो निलंबित

Jaunpur Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। सदर तहसील में तत्काल प्रमाण पत्रों के नाम पर चल रहे गोरखधंधे में प्रशासन ने भी तत्काल कार्रवाई की। व्यवस्था को लेकर डीएम ने इतनी सख्ती बरती कि दफ्तर खुलने के साथ जांच शुरू हो गई। जांच के दौरान तत्काल के नाम पर हुई जालसाजी खुल गई। साफ हो गया कि तहसील कर्मचारियों ने एसडीएम और तहसीलदार तक के फर्जी हस्ताक्षर बना लिए थे। पैसों के बल पर इन्हीं फर्जी हस्ताक्षर से आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी कर दिए। प्रारंभिक जांच में 49 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। प्रमाणपत्रों की व्यवस्था देख रहे नायब नाजिर बृजेश कुमार श्रीवास्तव तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरविंद मौर्य की भूमिका संदिग्ध पाई गई। दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पिछले करीब एक महीने से सदर तहसील में प्रमाण पत्रों को लेकर हल्ला मच रहा था। ज्यादा दबाव बना तो तत्काल वाली व्यवस्था कर दी गई। जैसी जरूरत वैसा रेट वाली व्यवस्था के चलते वास्तविक लोग पीछे छूट गए। ज्यादा हल्ला मचा तो अमर उजाला ने तहकीकात कराई। दो दिन की पड़ताल में पता चला कि जरूरत के हिसाब से रेट तय है। ज्यादा जरूरत, ज्यादा दाम। तत्काल के रेट अलग थे और सप्ताह भर के भीतर वाले रेट अलग तय कर दिए। इस धंधे में तहसील का एक चपरासी भी कूद गया। वह आवेदक खोज रहा था और तहसील के लोग प्रमाणपत्र का इंतजाम कर रहे थे। पैसों के आगे एसडीएम और तहसीलदार तक के फर्जी हस्ताक्षर शुरू हो गए।
अमर उजाला ने चार अगस्त के अंक में पैसा दीजिए, तत्काल प्रमाणपत्र लीजिए, शीषर्क से खबर प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया। खबर पढ़ते ही प्रशासन हरकत में आया। डीएम ने सुबह ही एसडीएम सदर और तहसीलदार को जांच के आदेश दिए। यह भी आदेश दिए गए कि तहसील खुलते ही प्रमाणपत्रों के दस्तावेज कब्जे में ले लें। ताकि हेराफेरी का मौका न मिले। डीएम के आदेश के क्रम में तहसील खुलते ही जांच शुरू हो गई। तहसीलदार सदर रमेश यादव की जांच में यह साफ हुआ कि 49 लोगों को तत्काल प्रमाणपत्र जारी किए गए। इन प्रमाणपत्रों पर एसडीएम और तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर हैं। तहसीलदार ने जांच के दौरान फर्जी रिपोर्ट वाले प्रमाणपत्रों को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले लिया। जब फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया तो अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पीके उपाध्याय भी सदर तहसील पहुंचे। एसडीएम, एडीएम की मौजूदगी में तहसीलदार ने प्रमाणपत्रों के इस गोरखधंधे में शामिल नायब नाजिर बृजेश कुमार श्रीवास्तव और नजारत में ही तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरविंद मौर्या की जिम्मेदारी तय की। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्टाफ मीटिंग में डीएम ने दोनों को निलंबित करने का आदेश दिया। डीएम के आदेश के कुछ ही देर के भीतर दोनों को निलंबित कर दिया गया। बृजेश श्रीवास्तव को कलेक्ट्रेट संयुक्त कार्यालय से तथा अरविंद मौर्या को नजारत से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की जांच एसडीएम बदलापुर ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपी गई है। तहसीलदार सदर रमेश यादव का कहना है कि दोनों को निलंबित कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच में 49 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। तहसीलदार और एसडीएम के हस्ताक्षर भी फर्जी थे।

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