पैसे दीजिए, तत्काल प्रमाणपत्र लीजिए

Jaunpur Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। पैसों के आगे नियम कानून बौने हो गए। प्रमाण पत्रों की व्यवस्था रेलवे के तत्काल टिकट जैसी हो गई है। सैंपल के तौर पर सदर तहसील में प्रमाण पत्रों के व्यवस्था की जांच कराई गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आवेदन पत्र कानूनगो को रिसीव होना चाहिए लेकिन पैसों के बल पर आवेदक को ही रिसीव करा दे रहे हैं। यदि उसने उसी दिन लेखपाल और कानून गो की रिपोर्ट लगवा दी तो शाम तक प्रमाण पत्र हाथ में होगा। वहीं व्यवस्था के तहत आवेदन करने वालों की हालत खराब है। तहसील के इतने चक्कर लगाए कि रिश्वत की रकम से ज्यादा खर्च हो गया। इसको लेकर महीनेभर पहले आवेदन कर चुके लोग आए दिन हंगामा कर रहे हैं। फिर भी व्यवस्था नहीं सुधर रही है।
पहले व्यवस्था निजी एजेंसी लोकवाणी के हाथों में थी। एकल खिड़की वाली व्यवस्था में भी फर्जीवाड़ा कम नहीं था। फर्जी प्रमाणपत्रों को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद निवर्तमान डीएम गौरव दयाल ने लोकवाणी से अनुबंध रद कर तहसील के हाथों व्यवस्था दे दी थी। व्यवस्था तहसील के हाथ में जाते ही हालत और खराब हो गई। वैसे भी प्रमाण पत्रों को लेकर जुलाई में सबसे ज्यादा दबाव रहता है। छात्रों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र दाखिले के वक्त जमा करना होता है। इस नाते तहसीलों में ज्यादा भीड़ जमा होती है। सदर तहसील में प्रमाण पत्रों को लेकर पिछले पंद्रह दिनों से हंगामा मचा हुआ है। हालत यह है कि पैसा देने वाले तुरंत ले जा रहे हैं और व्यवस्था के तहत आने वाले तहसील के चक्कर लगा रहे है। बताया जाता है कि प्रमाण पत्रों की व्यवस्था से जुड़े तहसील कर्मचारियों के एक दर्जन एजेंट काम कर रहे हैं। एक तरह से यही लोग प्रमाण पत्रों की पूरी व्यवस्था संभाले हुए हैं। प्रमाण पत्र के लिए तहसील के बजाय लोग एजेंटों को आवेदन कर रहे हैं। पैसों के हिसाब से प्रमाण पत्रों की प्राथमिकता तय हो रही है। जरूरत जितनी अधिक होगी रेट उतना अधिक देना पड़ रहा है। यदि दो दिन के भीतर प्रमाण पत्र चाहिए तो कम से कम पांच सौ रुपये देने होंगे। ऊपर से आवेदक को ही लेखपाल और कानून गो की रिपोर्ट भी लगवानी होगी। रिपोर्ट लगवाना भी आसान नहीं है। तहसील में आवेदन रिसीव करने के साथ आवेदक को ही रिपोर्ट लगवाने के लिए आवेदन पत्र वापस दे दिया जा रहा है। आवेदक लेखपाल और कानूनगो को तलाश कर रिपोर्ट लगवा रहा है। रिपोर्ट लगाने वाले कर्मचारी भी जरूरत के हिसाब से सौदेबाजी कर रहे हैं। हाथोहाथ रिपोर्ट लगवाने की कीमत अलग से अदा करनी होगी। वरना आवेदन पत्र देखते ही आवेदक को वापस कर दिया जाएगा। उसे समझाया जाएगा कि आवेदन पत्र आपको कैसे मिल गया। यह तहसील की व्यवस्था के तहत उनके पास आएगा तो रिपोर्ट लगेगी। तहसील में तहकीकात के बाद पता चला कि चुरावनपुर के राम लाल भारती ने 29 जून, महनपुर के मृदुल कुमार ने 12 जुलाई, दर्जे पट्टी के रिजवान ने 18 जुलाई, शहर के योगियापुर के शिव पूजन, किरन 17 जुलाई से तहसील के चक्कर लगा रही हैं। इन सभी ने इन तिथियों में प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। इनके प्रमाण पत्र पर अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं लगी। यह भी नहीं बताया गया कि प्रमाण पत्र बनेगा या नहीं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पीके उपाध्याय का कहना है कि ऐसा तो नहीं होना चाहिए। किसी ने शिकायत भी नहीं की। फिर भी तहकीकात कराएंगे वास्तविक स्थिति क्या है।

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