कलेक्ट्रेट से खाली हाथ लौटे अधिवक्ता

Jaunpur Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। आंदोलन के मुद्दे पर उभरे मतभेद के बाद दीवानी बार के अधिवक्ता कलेक्ट्रेट से वापस चले गए। कलेक्ट्रेट बार ने दीवानी बार के आंदोलन को दिया गया समर्थन वापस ले लिया तो दीवानी बार ने आंदोलन चलाते रहने का फैसला लिया। पूरे दिन चले हंगामे की खबर बार कौंसिल आफ उत्तर प्रदेश को भी दी गई। दीवानी बार अध्यक्ष प्रेम शंकर मिश्र और मंत्री अवधेश सिंह ने डीएम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। कहा कि डीएम अधिवक्ता, कर्मचारी संगठनों के बीच मतभेद पैदा कर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। उधर, कलेक्ट्रेट बार अध्यक्ष राजेश गुप्ता और मंत्री जयंत्री प्रसाद मिश्र ने दीवानी बार के कुछ सदस्यों पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। कहा कि दीवानी अधिवक्ता संघ के लोग कुछ समझने को तैयार नहीं थे। बैठक में उन लोगों ने ही विवाद की स्थिति पैदा की। ऐसे में आंदोलन का समर्थन जारी रख पाना मुश्किल हो रहा है। कलेक्ट्रेट बार ने आंदोलन का समर्थन नहीं करने का फैसला लिया है। राजस्व, मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ डीएम के समर्थन में उतर आए हैं। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया।
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बता दें कि 12 जुलाई को चार केंद्रीय कानूनों के विरोध में पूरे जिले के अधिवक्ता आंदोलन पर थे। दीवानी बार के अधिवक्ता डीएम आवास पर पत्रक देने गए थे। आरोप है कि डीएम ने खुद पत्रक लेने के बजाय एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट को फोर्स के साथ भेज दिया। शाम को डीएम के गार्ड ने दीवानी बार अध्यक्ष, मंत्री समेत 40 अधिवक्ताओं पर मारपीट, धमकी देने और दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया। यही विवाद की मूल वजह बनी। अगले दिन 13 जुलाई से दीवानी बार के अधिवक्ता आंदोलन पर चले गए। वकीलों की मांग है कि डीएम का तबादला किया जाए। दीवानी के वकीलों के आंदोलन का कलेक्ट्रेट बार समेत तहसीलों के अधिवक्ता संघों ने समर्थन किया। कई निजी संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी समर्थन किया। गुरुवार को कलेक्ट्रेट और दीवानी बार ने तय किया कि शुक्रवार को डीएम कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। तय मसौदे के तहत शुक्रवार सुबह कलेक्ट्रेट बार अध्यक्ष राजेश गुप्ता और मंत्री जयंत्री प्रसाद दीवानी बार को आमंत्रित करने पहुंचे। भरोसा दिलाकर आए कि कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन की व्यवस्था की जा रही है। कलेक्ट्रेट बार के बुलावे पर दीवानी बार के लोग पैदल ही डीएम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट गेट तक पहुंचे। यहां फिर कलेक्ट्रेट बार अध्यक्ष और मंत्री ने गेट पर अगवानी की और सभी को लेकर बार भवन चले गए। कहा गया कि धरना प्रदर्शन से पहले कुछ मुद्दों पर चर्चा कर ली जाए। पूर्व महामंत्री रवींद्र नरायण सिंह ने संचालन शुरू किया। कलेक्ट्रेट बार अध्यक्ष ने कहा कि डीएम ने वार्ता का प्रस्ताव दिया है। दोनों बारों के अध्यक्ष मंत्री और चार-छह सम्मानित सदस्य डीएम के चैंबर में बातचीत कर सकते हैं। यहीं से बात बिगड़ गई। दीवानी बार के अधिवक्ता भड़क गए। वकीलों का कहना था कि डीएम के चैंबर में क्यों बात होगी। बात करनी है तो बार सदन में आए। इसके बाद हंगामे जैसे हालात बन गए। दीवानी बार के अधिवक्ता बैठक छोड़ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के उत्तरीगेट से बाहर निकल गए। सभी नारेबाजी करते हुए दीवानी न्यायालय पहुंचे। यहां फिर बार भवन में साधारण सभा की बैठक शुरू हुई। बैठक में ही कलेक्ट्रेट बार में हुई घटना की निंदा की गई। साथ ही बैठक में मौजूद बार कौंसिल के सदस्य हरिशंकर सिंह और रवि सिंह को अवगत कराया गया। दोनों सदस्यों ने बार कौंसिल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पूरी घटना से अवगत कराया। बताया कि सोमवार को बार कौंसिल का कोई पदाधिकारी दीवानी बार के आंदोलन में शामिल होगा। बार कौंसिल सदस्यों ने कहा कि डीएम चाहते तो विवाद खत्म हो सकता था लेकिन अहम के कारण आंदोलन को तूल दे रहे हैं। साथ ही अधिवक्ता संगठनों और कर्मचारियों बीच बंटवारा करा रहे हैं। कलेक्ट्रेट बार की बैठक में दीवानी बार को दिया गया समर्थन वापस लेने का फैसला लिया गया। कहा गया कि शनिवार से कलेक्ट्रेट अधिवक्ता रोज की तरह न्यायिक कार्य करेंगे।
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