केराकत ब्लाक प्रमुख की कुर्सी भी दांव पर

Jaunpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। केराकत क्षेत्र पंचायत प्रमुख को बचाने और हटाने में दो दोस्त आमने सामने हो गए हैं। प्रमुख को बचाने मे ध्रुव कुमार सिंह ने गतिविधियां तेज कर दी हैं तो प्रमुख को हटाने में प्रमोद कुमार सिंह बीडीसी सदस्यों को लामबंद कर रहे हैं। प्रमोद सिंह और ध्रुव सिंह छात्र जीवन से एक दूसरे के दोस्त रहे। कारोबार से लेकर इलाके की राजनीति में भी दोनों की सक्रीयता बराबर देखी जा रही थी। अब ब्लाक प्रमुख को हटाने और बचाने में दोनों आमने सामने आ गए हैं।दम खम में दोनों किसी से कम नहीं। खास बात यह है कि न तो प्रमोद सिंह बीडीसी हैं और न ही ध्रुव कुमार सिंह। इस जंग से दोनों स्वयं को किं गमेकर साबित करना चाहते हैं।इस बीच किसी अनहोनी को लेकर प्रशासन भी सतर्क है।
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मालूम हो कि केराकत ब्लाक प्रमुख प्रेम लता के खिलाफ भी चार जुलाई को बीडीसी श्याम लाल और उनकी पत्नी रंभा देवी ने अविश्वास प्रस्ताव की चिट्ठी डीएम को सौंपी थी। प्रमुख विरोधी खेमे की अगुवाई पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रमोद कुमार सिंह कर रहे हैं। डीएम ने बीडीसी सदस्यों की चिट्ठी पर पहली अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई है। पहली को ब्लाक प्रमुख के भाग्य का फैसला होना है। ब्लाक की राजनीति में सक्रिय बेहड़ा के ध्रुव कुमार सिंह तथा बंबावन के प्रमोद कुमार सिंह आमने-सामने दिख रहे हैं। ध्रुव कुमार सिंह ने ही अगुवाई कर प्रेम लता को प्रमुख बनाया था तो कुर्सी बचाने में भी अह्म रोल अदा कर रहे हैं। उधर, प्रमोद कुमार सिंह ने रंभा देवी को चुनाव लड़ाया था। वे अविश्वास प्रस्ताव की अगुवाई कर रहे हैं। प्रमोद सिंह को ब्लाक प्रमुख बनाने में भी ध्रुव कुमार सिंह ने अह्म रोल अदा किया था। दोनों की नजदीकी रिश्तेदारी भी बताई जा रही है। ध्रुव सिंह के भाई बेहड़ा के प्रधान संजय सिंह और प्रमोद सिंह रिश्ते में साढ़ू हैं। अब ब्लाक की राजनीति में दोनों आमने-सामने हैं। प्रमोद सिंह का दावा है कि 49 बीडीसी सदस्यों ने ब्लाक प्रमुख के खिलाफ हस्ताक्षर युक्त चिट्ठी डीएम को सौंपी है। मौजूदा समय में उनके साथ 51 बीडीसी ़साथ हैं। आठ बीडीसी उनके संपर्क में है। दूसरी ओर ध्रुव कुमार सिंह का कहना है कि प्रमुख की कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित है। चुनाव के वक्त जितने लोग उनके साथ थे आज भी चट्टान की तरह खड़े हैं। विरोधी खेमे को पहली अगस्त को अपनी औकात का पता चल जाएगा। 81 सदस्यीय क्षेत्र पंचायत में अविश्वास के लिए 41 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
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