जालसाजी के तार लखनऊ से जुड़े

Jaunpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। तीन दिन तक तथ्य खंगालने के बाद लखनऊ और बनारस की एसबीआई विजलेंस टीम रविवार को वापस हो गई है। उधर, पुलिस ने भी कई तथ्य जुटा लिए हैं। जांच कर रही पुलिस को तीन बैंक खातों में 75 लाख रुपये का पता चला है। पुलिस ने तीनों बैंक खातों को सीज करवा दिया है। इसके अलावा जालसाजी के मुख्य आरोपी जौनपुर के नहीं बल्कि लखनऊ के हैं। ज्यादातर पैसा लखनऊ वाले ही उठा ले गए। पुलिस ने शहर से सटे परियावां गांव के एक व्यक्ति से भी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इसी के जरिए लखनऊ के लोगों ने जालसाजी को अंजाम दिया।
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एसबीआई मेन ब्रांच से नौ जुलाई को 2.85 करोड़ रुपये फर्जी चेक के जरिए नकद भुगतान करा लिए गए। जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब मेन खातेदार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) गोंडा ने आपत्ति जताई। इस नाते कि एफसीआई का ही फर्जी चेक जौनपुर में पीडब्ल्यूडी ठेकेदार विनय कुमार सिंह के खाते में कैश करा लिया गया था। विनय सिंह को तो पुलिस ने जेल भेज दिया लेकिन दूसरे आरोपी राजन सिंह तक पहुंचने की कोशिश जारी है। पता चला है कि पुलिस ने राजन सिंह के दूसरे स्रोतों से 40 लाख रुपये का पता लगाया है। यह पैसा राजन सिंह ने बैंक खाते में जमा कराया था। 27.50 लाख काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक शाखा शेरवां में जमा कराए गए थे। इस खाते को तो पुलिस ने सीज कर दिया है। इस तरह अब तक करीब 75 लाख रुपये ट्रेस हो गए हैं। अभी सबसे मोटी रकम करीब दो करोड़ का ट्रेस होना बाकी है। पुलिस ने भी जांच में जल्दबाजी दिखाई। बगैर माल बरामदगी के विनय कुमार सिंह को जेल रवाना कर दिया। अब विनय सिंह को रिमांड पर लेने की तैयारी चल रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लखनऊ के गोमती नगर और इंदिरा नगर के चार लोग इस रैकेट के मुखिया हैं। जौनपुर के लोग तो सिर्फ जालसाजी का माध्यम बने। मुख्य आरोपी तो करीब डेढ़ करोड़ रुपया लेकर चंपत हो गए। पता चला है कि परियावां गांव के एक रिटायर्ड अधिकारी से लखनऊ वाले रैकेट के तार जुड़े हुए थे। इस अधिकारी की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। लखनऊ के रैकेट ने जाली चेक तैयार कराया और परियावां वाले शख्स के जरिए ही एसबीआई मेन ब्रांच में कैश कराने में भी कामयाब हो गए। पुलिस का मानना है कि जौनपुर के लोग तो इसमें इस्तेमाल किए गए। मोटी रकम तो लखनऊ वाले उठा ले गए। यह सही है कि पैसों का बंटवारा बड़ी ईमानदारी के साथ हुआ। जिसका जैसे काम था उसे उतनी रकम बगैर किसी झंझट के बांट दी गई। सरकारी पैसा होने के नाते सभी बेखौफ थे। किसी को भरोसा नहीं था कि इतनी जल्दी मामला खुल जाएगा। खुलता भी नहीं लेकिन बैंक ट्रांजेक्शन होने के नाते पूरी तरह साफ था कि किसके खाते से कितनी रकम किस खाते में भेजी गई। इसी आधार पर पुलिस जालसाजी की कडि़यां जोड़ने की कोशिश कर रही है। उधर, आंतरिक जांच में जुटी एसबीआई विजलेंस की दोनों टीमे रविवार को कागजात समेट लौट गई। रविवार को बाहर से बैंक में ताला लगा था तथा अंदर जांच पड़ताल जारी थी। अपराह्न करीब दो बजे टीम रवाना हो गई। विजलेंस टीम ने बैंक के सीसी कैमरों की फुटेज भी कब्जे में लिए हैं। सीसी फुटेज के जरिए आरोपियों की शिनाख्त और बैंक अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका का पता लगेगा। इस नाते कि बैंक के हर कोने में सीसी कैमरे की नजर है। कैश काउंटर से लेकर स्ट्रांग रूम तक की रिकार्डिगिं विजलेंस टीम ने कब्जे में ली है। फिलहाल एसबीआई के लोग इस प्रकरण में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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