ब्लाक प्रमुख की कुर्सी छिनी

Jaunpur Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
सिकरारा (जौनपुर)। महीनेभर की गहमागहमी के बाद सिकरारा ब्लाक प्रमुख माला देवी गौतम अपदस्थ कर दी गईं। बुधवार को ब्लाक मुख्यालय पर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद हुए मतदान में प्रमुख को बेदखल कर दिया गया। उपस्थित 64 सदस्यों में से 61 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया तथा प्रमुख समेत तीन सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। मतदान के तुरंत बाद हुई मतगणना में एसडीएम सदर शारदा प्रसाद यादव ने प्रमुख को अपदस्थ घोषित किया। प्रमुख को कुर्सी बेदखल करने की नोटिस भी चस्पा कर दी गई। इसी के साथ प्रमुख विरोधी खेमे में उल्लास का माहौल बन गया। वहीं प्रमुख माला देवी खाली हाल में कुछ देर अकेले बैठी रहीं।
ककोहिया की क्षेत्र पंचायत सदस्य अनारा देवी ने 31 मई को 51 सदस्यों का हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थनापत्र डीएम को सौंपा था। डीएम ने प्रार्थनापत्र पर विचार के बाद 27 जून को अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाई थी। अविश्वास प्रस्ताव की बैठक की तिथि तय होने के बाद दोनों खेमा लामबंद हो गया था। प्रमुख खुद को बचाने की कोशिश में लगी रहीं तो अनारा का खेमा प्रमुख को हटाने में लगा रहा। बुधवार को आखिरकार प्रमुख माला देवी खुद को नहीं बचा सकीं। अनारा देवी ने ऐसा समर्थन जुटाया कि प्रमुख का खेमा कहीं टिक नहीं सका। इसी के साथ सिकरारा ब्लाक प्रमुख बसपा की माला देवी गौतम की भी विदाई हो गई। पूर्वाह्न 11 बजे से बैठक शुरू हुई और एक बजे से तीन बजे तक मतदान कराया गया। मतदान तो दो बजे ही खत्म हो गया था लेकिन एक घंटे शेष सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया गया। मतदान में 64 बीडीसी सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें से 61 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में तथा प्रमुख समेत तीन सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। 17 निरक्षर महिला बीडीसी को मतदान के लिए सहायका उपलब्ध कराया गया। 78 सदस्यीय क्षेत्र पंचायत में 61 बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास जता अपदस्थ कर दिया। मतदान शुरू होने से पहले सदस्यों को छोड़ बाकी सभी को बाहर कर दिया गया। निरक्षर महिला सदस्यों ने सहायक मांगा तो उनके रिकार्ड खंगाले गए। ब्लाक कार्यालय में उपलब्ध रिकार्ड के आधार पर निरक्षर घोषित किया गया और पंचायत एक्ट में दी गई व्यवस्था के तहत इन्हें सहायक उपलब्ध कराया गया।
अविश्वास प्रस्ताव की बैठक शुरू होते ही बीडीसी प्रेम चंद्र और विनोद कुमार ने प्रमुख पर विकास कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया। यह भी कहा कि विकास कार्यों में भेदभाव बरता गया। अपने चहेतों को प्रमुख ने काम दिया। पांच मिनट बाद प्रमुख माला देवी बैठक से उठकर अपने कमरे में चली गईं। फिर मतदान के लिए लौटीं और मतगणना के बाद अपदस्थ कर दिए जाने के बाद पीठासीन अधिकारी एसडीएम सदर से मुलाकात करने पहुंचीं। बाद में खंड विकास अधिकारी, कर्मचारियों तथा ब्लाक के अन्य स्टाफ को अलविदा कह अपने पति सभाजीत गौतम के साथ रवाना हो गईं। इस दौरान नायब तहसीलदार महादेव प्रसाद, बीडीओ प्रवीणानंद, एडीओ (एसटी) संतोष सिंह आदि मौजूद थे। प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने की सूचना मिलते ही मुख्यद्वार पर प्रमुख के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। कुछ लोगों के जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। इस दौरान अनारा देवी के पति पूर्व प्रधान राम लौटन, सपा नेता राजनाथ यादव, ओम प्रकाश, गुलाब चंद्र यादव, मनोज कुमार राहुल, विकास उपाध्याय, इंद्रपाल विश्वकर्मा, मनोज यादव, जय प्रकाश, राम सुख यादव आदि मौजूद थे।

निर्विरोध चुनी गई थी माला
सिकरारा। माला देवी गौतम 18 दिसंबर 2010 निर्विरोध प्रमुख चुनी गई थीं। निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता अनारा देवी ने ही साफ किया था। बसपा की माला देवी के खिलाफ अनारा देवी ने नामांकन दाखिल किया था लेकिन नाम वापसी वाले दिन परचा वापस कर माला देवी का रास्ता साफ कर दिया था। 27 जून को अनारा देवी ने ही माला देवी को अपदस्थ करवा दिया।

सदस्यों के निर्णय का स्वागत
सिकरारा। अपदस्थ किए जाने के बाद प्रमुख माला देवी गौतम ने कहा कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों के निर्णय पर कोई शिकायत नहीं है। सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश की गई लेकिन एक साथ सभी को संतुष्ट कर पाना संभव नहीं है। हर बीडीसी को ब्लाक में विकास कार्यों के ठेके चाहिए था। एक साथ सबको कैसे ठेका और काम दिए जा सकते हैं। वह मुंबई से आई थी और अपनी दुनिया में फिर चली जाएंगी। कहा कि अफसोस इस बात का है कि जिन लोगों ने हमें प्रमुख बनाया उन्हीं लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते साजिश कर अपदस्थ करा दिया। उन्होंने अपने परिवार के एक सदस्य पर प्रमुख के कामकाज में दखलंदाजी का आरोप लगाया।

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