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बीटीसी के 21 छात्रों पर एफआईआर

Jaunpur Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। बीटीसी के जरिए शिक्षक बनने की योजना धरी रह गई। जांच हुई तो 21 छात्र फर्जी पाए गए। इनके खिलाफ 21 जून को डायट प्राचार्य ने शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया है। इन सभी का बीटीसी कोर्स में दाखिला पिछले वर्ष 2011 में हुआ था। फर्जीवाड़े में सिकरारा थाने के ककोहिया गांव के सबसे अधिक छह छात्र हैं। इन सभी के अंकपत्र संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने फर्जी घोषित कर दिए थे।
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यहां बता दें कि बीटीसी में अभी भी मेरिट के आधार पर ही दाखिले होते हैं। बीटीसी का मतलब शिक्षक बनने का रास्ता साफ है। वर्ष 2011 में मेरिट के आधार पर दाखिले ले लिए गए लेकिन बाद में अंकपत्रों का सत्यापन भी शुरू हुआ। दाखिला पाने वालों में सबसे अधिक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र थे। डायट ने सत्यापन के लिए भेजा तो फर्जी अंकपत्रों का धंधा करने वाले लोग विवि पहुंच गए। डायट प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए संदेशवाहक बनकर संग्राम सिंह यादव नाम के किसी व्यक्ति ने विवि से सत्यापन रिपोर्ट भी प्राप्त कर ली। इधर, जब सत्यापन रिपोर्ट डायट नहीं पहुंची तो प्राचार्य केएन कपूर खुद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे। संस्कृत विश्वविद्यालय से बताया गया कि किसी संग्राम सिंह यादव नाम के कर्मचारी को सत्यापन रिपोर्ट रिसीव करा दी गई है। इस पर डायट प्राचार्य ने कहा कि इस नाम का तो डायट में कोई कर्मचारी ही नही है। फिर विश्वविद्यालय ने दूसरी सत्यापन रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के मुताबिक जलालपुर थाने के कोठवा निवासी सुशील कुमार, सोइरी निवासी चंदन कुमार, सिकरारा थाने के ककोहिया निवासी रेखा यादव, अनीता यादव, धर्मादेवी, मंजू यादव, जयहिंद यादव, खपरहा निवासी अनिल कुमार, रीठी निवासी शाहिदा, दविलहा निवासी संतोष कुमार पटेल, बक्शा थाने के हरिबल्लभपुर निवासी सुभाष चंद्र यादव, महराजगंज थाने के कठार निवासी प्रीती सिंह, मछलीशहर के कंधापुर निवासी रीना यादव, इसी गांव के योगेंद्र प्रताप यादव, चंदवक थाने के बोदरी निवासी महेंद्र यादव, मडि़याहूं के रामपुर नद्दी निवासी परमिला देवी, बदलापुर के बनगांवा पट्टी निवासी सुजीत कुमार यादव, देवरिया निवासी संध्या यादव, गिरधरपुर निवासी आशीष कुार यादव, सरपतहां थाने के पट्टीनरेंद्रपुर निवासी पंकज कुमार दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने बताया कि डायट प्राचार्य की तहरीर पर 21 जून को मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना भंडारी चौकी प्रभारी कर रहे हैं। अंकपत्र फर्जी पाए जाने से साफ है कि जिले में बड़े पैमाने पर अंकपत्रों का धंधा चल रहा है। यही रैकेट सत्यापन से लेकर भर्ती तक की गारंटी लेता है। यदि डायट प्राचार्य खुद दिलचस्पी नहीं लेते तो सभी सुरक्षित बच भी जाते।
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