जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी गई

Jaunpur Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। भारी गहमागहमी के बीच बसपा की जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता सिद्धार्थ को सदस्यों ने मुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद मतदान कराया गया। अध्यक्ष समेत उपस्थित 45 सदस्य उपस्थित थे लेकिन मतदान में 44 ने हिस्सा लिया। इनमें से सभी 44 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट देकर जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता सिद्धार्थ को सत्ता से बेदखल कर दिया। इसी के साथ करीब महीनेभर से चल रही रस्साकसी भी खत्म होती दिखी।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पिछले कई दिनों से खींचतान चल रही थी। जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र यादव के नेतृत्व में सदस्यों ने अविश्वास जताया था। डीएम ने रविवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सदन की बैठक बुलाई थी। बैठक की अध्यक्षता एडीजे कर रहे थे। बैठक में कुल 73 सदस्यों में से 45 सदस्य शामिल हुए। 28 तटस्थ सदस्य बैठक में नहीं उपस्थित हुए। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता सिद्धार्थ खुद भी मौजूद थीं। बैठक तो सुबह दस बजे से ही बुलाई गई थी लेकिन सदस्यों को उपस्थित होने के लिए डेढ़ बजे तक वक्त दिया गया था। दोपहर एक से डेढ़ बजे तक मतदान कराया गया। मतदान के तुरंत बाद मतों की गिनती में अनीता सिद्धार्थ के खिलाफ 44 लोगों ने अविश्वास जताया। मतदान में शामिल 44 में से किसी भी सदस्य ने अनीता के पक्ष में मतदान नहीं किया। सभी ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया। इसी के साथ अनीता सिद्धार्थ अपदस्थ घोषित कर दी गईं। अनीता सिद्धार्थ ने 14 जनवरी 2011 को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की शपथ लिया था। इस हिसाब से अनीता अध्यक्ष की कुर्सी पर एक वर्ष पांच महीने तीन दिन तक ही रह पाई।
अनीता सिद्धार्थ के पति डा. लाल बहादुर सिद्धार्थ ने कुर्सी बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन सत्तारुढ़ सपा के आगे वह कुछ नहीं कर सके। कोशिश यही थी कि जिला पंचायत सदस्यों को बैठक तक पहुंचने ही नहीं दिया जाए। काफी हद तक कामयाब भी रहे। 28 सदस्यों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया लेकिन कुर्सी बचाने के लिए कम से कम 37 सदस्यों की जरूरत थी। इस जादुई आंकड़े तक अध्यक्ष का खेमा नहीं पहुंच पाया। वहीं अविश्वास जताने वाले सदस्य की संख्या भारी पड़ गई। निर्धारित सीमा से सात अधिक जिला पंचायत सदस्यों ने मतदान किया।
रविवार सुबह से ही सदस्यों की घेराबंदी जारी रही। पशुधन एवं लघु सिंचाई मंत्री पारसनाथ यादव के जेसीज स्थित आवास पर नौ बजे तक भीड़ लगी रही। पारसनाथ यादव साढ़े नौ बजे लाइन बाजार स्थित दिनेश चौधरी के आवास पहुंचे। यहां से सदस्यों को जिला पंचायत के लिए रवाना करने के बाद खुद पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस लौट आए। गेस्ट हाउस से ही अविश्वास प्रस्ताव पर नजर रखे हुए थे। अविश्वास प्रस्ताव के वक्त सपा का पूरा खेमा डटा रहा। सपा जिलाध्यक्ष राज बहादुर यादव, विधायक सचींद्र नाथ त्रिपाठी, कामरेड ऊदल यादव, विधायक ओम प्रकाश दुबे उर्फ बाबा, पूर्व जिलाध्यक्ष डा. अवधनाथ पाल, सतईराम यादव, पूर्व एमएलसी लल्लन यादव, कुंवर वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जावेद अंसारी जिला पंचायत सभागार के बाहर निगरानी कर रहे थे। 45 सदस्यों के हाल में पहुंच जाने के बाद सभी आश्वस्त थे कि अब अध्यक्ष को कोई नहीं बचा पाएगा। इस नाते कि अध्यक्ष वाला खेमा बैठक से दूर रहा। बैठक में वही लोग पहुंचे जो अध्यक्ष को हटाना चाहते थे। अविश्वास प्रस्ताव पास होने के तुरंत बाद गेस्ट हाउस में बैठे मंत्री पारसनाथ यादव भी मौके पर पहुंचे। यहां पारस को देखते ही जिंदाबाद के नारे लगने लगे।

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