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रेल पथ कर्मचारियों पर संकट

Jaunpur Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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मल्हनीबाजार। दून हादसे की जांच कर रहे सीआरएस के सामने चार स्टेशनों के कर्मचारियों समेत32 कर्मचारियों ने बयान दर्ज कराए। दून से पहले पास हुई ट्रेनों के चालक और गार्ड ने सीआरएस के सामने ट्रैक की किसी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार कर दिया। दून से पहले गोदान एक्सप्रेस, टाटा अमृतसर एक्सप्रेस इसी ट्रैक से पास हुई थी। इन दोनों के गार्ड और चालक ने कहा कि जब उनकी गाड़ी पास हुई तो किसी तरह की दिक्कत नहीं थी। वहीं यह कहने वाले लोगों की कमी नहीं रही कि रेलवे ट्रैक में बकलिंग के कारण रेल हादसा हुआ। पता चला है कि हादसे की वजह रेल पथ विभाग पर डालने की कोशिश की जा रही है। इस नाते कि रेल पथ निगरानी करने वाले स्टाफ को घटना वाले दिन बनारस के लिए रवना कर दिया गया था।
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लखनऊ में सीआरएस ने लगातार दूसरे दिन रेल हादसे में कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। हर कर्मचारी से जवाब सवाल किए गए। पहले दिन 53 में से 32 कर्मचारियों ने बयान दर्ज कराया था। दूसरे दिन शनिवार को 46 कर्मचारियों ने देर रात तक अपना बयान दर्ज कराया। बयान के लिए पहुंचे कर्मचारियों, अधिकारियों को हिदायत थी कि जब तक जांच प्रक्रिया पूरी नही हो जाती तब तक कोई जाएगा नहीं। इस नाते शाहगंज, जौनपुर, मिहरावां, खेतासराय और महंगावा रेलवे स्टेशन के कर्मचारी लखनऊ में ही जमे हुए हैं। कर्मचारियों के बीच कुछ रेल यात्रियों ने सीआरएस को बयान दर्ज कराया है कि ट्रेन के पहिए पहले से ही लहरा रहे थे। मुगलसराय पहुंचने पर तेज हो गया। इससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि ट्रेन के पहियों में पहले से गड़बड़ी थी। वहीं कुछ लोगों ने यह भी बताया कि हादसे से पहले अचानक ट्रेन लहराने लगी। कुछ ही देर में बीच के पांच डिब्बे तेज आवाज के साथ पलट गए। कहा जा रहा है कि रेलवे का आपरेटिंग विभाग मामला रेल पथ विभाग की ओर धकेलना चाहता है तथा रेल पथ विभाग आपरेटिंग विभाग की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रहा है। इन आरोप प्रत्यारोप के बीच सीआरएस को तय करना है कि हादसे की वजह क्या रही। कहा जा रहा है कि रेल पथ विभाग के कर्मचारियों की गर्दन फंसनी ही है। हादसे की वजह ट्रैक में बकलिंग साबित करने की कोशिश हुई है। उधर, फैजाबाद में जांच के दौरान बोगियों में भी गड़बड़ी सामने आई है। रेल पथ विभाग कह रहा है कि डिब्बे पहले से गड़बड़ थे और आपरेटिंग विभाग कह रहा है कि डिब्बे कतई खराब नहीं थे। यदि खराब होते तो हावड़ा से जौनपुर तक ट्रेन कैसे पहुंचती और किसी गड़बड़ी को पकड़ी क्यों नहीं।

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