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समर्थन मूल्य से छोटे-मझोले किसान गायब

Jaunpur Updated Sat, 09 Jun 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। कुल गेहूं खरीद और किसानों की संख्या में भारी अंतर है। तीन जून तक गेहूं खरीद रिपोर्ट पर भरोसा करें तो समर्थन मूल्य से छोटे और मझोले किसान गायब हैं। गेहूं खरीद के जबरदस्त दबाव का असर यह हुआ कि खरीद एजेंसियां बड़े किसानों पर मेहरबान हो गईं। खरीदे गए कुल गेहूं और किसानों की संख्या बताती है कि प्रति किसान 35 कुंतल गेहूं खरीदा गया। यदि एजेंसीवार यह औसत देखा जाए तो यूपीएसएस जैसी खरीद एजेंसी ने प्रति किसान औसत 49 कुंतल गेहूं खरीद डाला। गेहूं खरीद में लगाए गए आढ़तियों ने भी बहती गंगा में हाथ धोया। 55 आढ़तियों ने 47 कुंतल प्रति किसान की दर से 956 किसानों से 4509 कुंतल गेहूं खरीद डाला। अहम सवाल है कि दस-बारह कुंतल वाले किसान कहां चले गए। छोटे किसानों का गेहूं कहां चला गया। ऐसा नहीं है कि छोटे किसानों ने गेहूं बेचा नहीं। सबसे ज्यादा तो छोटे किसानों ने ही गेहूं बेचा। इस नाते कि उनकी जरूरत फसल से ही पूरी होती है। लेकिन समर्थन मूल्य योजना में उनका कोई योगदान नहीं दिखता। 35 कुंतल प्रति किसान खरीद का औसत है। जरूरी नहीं कि एक किसान से 35 कुंतल ही खरीदा गया हो।
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गेहूं खरीद के तीन जून के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 20031.35 मीट्रिक टन गेहूं खरीद जा चुका है। यानी करीब 200313.5 कुंतल गेहूं खरीद लिया है। यह खरीद 111 सरकारी क्रय केंद्रों तथा 55 आढ़तियों के माध्यम से की गई है। पीसीएफ की खरीद सामान्य मानी जाएगी। पीसीएफ के 83 क्रय केंद्रों ने 25 कुंतल प्रति किसान के औसत से गेहूं खरीद की है। यह आंकड़े स्वीकार्य हो सकते हैं लेकिन प्रति किसान 50 कुंतल खरीद किसी के गले नहीं उतरने वाला। इस नाते कि जिले में काश्त बहुत लंबी नहीं है। मिट्टी उपजाऊ जरूर है लेकिन जोत छोटी होने के नाते दस फीसदी किसान ही 50 कुंतल से अधिक गेहूं की बिक्री करते होंगे। वैसे भी जिले की आबादी 45 लाख से अधिक है और तीन जून तक केवल 5674 किसानों से ही गेहूं खरीदा गया है। जिले के कुल 615399 बोरे उपलब्ध कराए गए। इनमें से 304968 बोरों का इस्तेमाल हो चुका है। प्रशासन के पास तीन जून तक 310431 बोरे बचे हुए थे। खरीद की ताजा स्थिति बताती है कि जिले में गेहूं खरीद का निर्धारित कुल लक्ष्य 35860 मीट्रिक टन के सापेक्ष अधिक खरीद हो जाएगी। इसलिए भी कि अब गेहूं खरीद ने तेजी पकड़ी है। खरीद एजेंसियां यह कतई नहीं देख रही कि बड़े किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है या फिर छोटे किसानों का। खरीद एजेंसियों से सिर्फ गेहूं आने से मतलब है। यही वजह है कि जिले में हुई कुल खरीद में सिर्फ 5674 किसानों की ही हिस्सेदारी है। हुआ यह है कि छोटे किसानों का गेहूं मार्केट में पहले पहुंच गया था। बाद में मार्केट के जरिए किसानों के नाम क्रय केंद्रों तक पहुंच गया।

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