गर्द गुबार के बीच मची भगदड़

Jaunpur Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। 45 डिग्री से अधिक तापमान के बीच ज्यादातर लोग खुली हवा की तलाश में थे। दोपहर का वक्त होने के नाते कुछ लोग खा रहे थे तो कुछ झपकियां ले रहे थे। दोपहर 13 बजे तक सब कुछ ठीकठाक था। ट्रेन 95 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से पास हो रही थी। जौनपुर से सीधे शाहगंज स्टेशन पर स्टापेज होने के नाते ट्रेन चालक सुरेंद्र बहादुर बेलौस ट्रेन को लेकर जा रहा था। सुरेंद्र के मुताबिक थ्रो आउट सिग्नल मिलने के कारण स्पीड कम करने या फिर ट्रेन रोकने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। लिहाजा वह पूरी स्पीड के साथ पास हो रहा था। 13.15 बजे से ठीक पहले इंजन पास हुआ तो चालक ने झटके महसूस किए। स्पीड कमजोर की और ब्रेक दबाया लेकिन पहले से ही इतनी स्पीड थी कि हादसे के बाद ही ट्रेन रुकी।
हादसा होते ही इतनी धूल उठी कि गुबार के बीच करीब दस मिनट तक कुछ समझ में नहीं आया। खड़खड़ाहट इतनी तेज थी कि आसपास के गांवों तक सुनी गई। मिहिरावां, राजेपुर, लपरी, मानी कला तक के लोग दहल गए। गांव के लोगों को यह पता लगाने में देर नहीं लगी कि कोई हादसा हुआ है। जो जहां वैसे ही मौके पर दौड़ा। ट्रेन में सवार वाराणसी के सै. हुमारे, इनकी पत्नी फाकरा बानो के मुताबिक झटका तो लगा लेकिन कोई यह नहीं समझ पाया कि ट्रेन पलटने वाली है। लोगों ने सोचा कि सामान्य तरीके से ट्रेन ने कोई पटरी क्रास की होगी। जब डिब्बे पलटने लगे तो किसी ने हल्ला मचाया कि ट्रेन में आग लग गई है। इसके बाद तो तमाम लोग डिब्बों से कूदने लगे। एस थ्री बोगी में सवार गया के केपी अग्रवाल हरिद्वार जा रहे थे। बताया कि गड़गड़ाहट के बीच पूरी ट्रेन पलट गई। यह सब पलक झपते हुआ। एस-7 में अपने दस साथियों की तलाश में भागे। सभी सुरक्षित थे लेकिन ट्रेन के भीतर हल्ला मचा रहे थे। ट्रेन के ऊपर चढ़कर एक-एक को बाहर निकाला गया। एस थ्री में सवार मनोज कुमार मित्रा कोलकाता से हरिद्वार जा रहे थे। अचानक ब्रेक लगने जैसे झटके लगे। लोगों ने सोचा कि सिग्नल के चलते इमरजेंसी ब्रेक लगा होगा लेकिन तुरंत बाद हादसे की खबर लगी। गया के प्रकाश कुमार लखनऊ जा रहे थे। प्रकाश ने कहा कि अभी तक ट्रेन दुर्घटना को केवल टीवी में देखा। गुरुवार को उन्होंने हादसे को नजदीक से देखा। कोलकाता के भवानीपुर निवासी एनपी चौधरी ने बताया कि 25 लोगों के साथ वह हरिद्वार जा रहे थे। खाना खाकर सोए हुए थे कि अचानक झटका लगा। कुछ ही देर में वह ऊपर बाली बर्थ से नीचे आ गए। खिड़की से बाहर झांका तो अफरातफरी मची थी। किसी तरह डिब्बे से कूदकर जान बचाई। ग्रुप के लोगों को तलाश रहे थे लेकिन कोई मिला नहीं। एस फाइव कोच में यात्रा कर रही ममता कुशवाहा ने बताया कि वह अपने बड़े बेटे के साथ देहरादून जा रही थी। अफरातफरी के बीच वह खुद ही कूदकर बेटे के साथ बाहर आ गई। ममता ईश्वर को धन्यवाद दे रही थी। एस फाइव पूरी बोगी पलट गई थी। बिहार के सीतामढ़ी निवासी कवि राहत विशुनपुरी रुदौली जा रहे थे। राहत ने बताया कि पूरी बोगी पलट गई। लोग एक दूसरे पर गिर गए। जैसे-तैसे लोग बाहर निकले। कोलकाता के अनूप चटर्जी अपने 45 साथियों को खोज रहे थे। सभी अलग-अलग डिब्बों में सवार होने के नाते बिछड़ गए थे। पूरा परिवार भारी दहशत में था।

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