स्कूल पर तैनाती से भाग रहे शिक्षक

Jaunpur Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। मडि़याहूं ब्लाक के प्राइमरी स्कूल उन्चनी कला की एक महिला शिक्षामित्र की शिकायत पर पूरी व्यवस्था ठप सी हो गई। स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत तीन को हटा देने से पूरा स्कूल खाली हो गया। शिक्षामित्र ने भी खूब दबंगई दिखाई। स्कूल के कागजात बताते हैं कि उसके खिलाफ कई प्रधानाध्यापक, एबीएसए लगातार रिपोर्ट करते रहे लेकिन कार्रवाई के बजाय मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता रहा। शिक्षामित्र ने ऐसे आरोप लगाए कि एबीएसए को तो हटाया ही गया स्कूल के तीन शिक्षकों को भी बगैर किसी जांच के प्रशासनिक आधार बनाते हुए हटा दिया गया। जबकि बीएसए ने कहा था कि शिकायत की जांच के बाद हटाया गया।
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20 जनवरी 2011 को भी तत्कालीन प्रधानाध्यापक राजबली यादव और शिक्षकों ने डीएम से शिकायत की थी कि शिक्षामित्र चारित्रक दोष का आरोप लगाने के लिए धमकी दे रही है। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 20 सितंबर 2011 को फिर शिक्षकों और हेडमास्टर ने बीएसए से लिखित शिकायत की कि शिक्षामित्र बर्खास्त, निलंबित तथा अन्य आरोप में फंसाने की धमकी दे रही है। 13 अप्रैल 2012 को शिक्षकों तथा प्रधानाध्यापक रवींद्र सिंह ने एबीएसए से धमकाने की शिकायत की। 28 मार्च 2012 को एनपीआरसी ने भी शिक्षामित्र की शिकायत एबीएसए से की। इनसे पहले 14 सितंबर 2011 को महिला शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी एबीएसए से शिक्षामित्र की शिकायत की थी। 18 अप्रैल को उक्त शिक्षामित्र ने डीएम से चारित्रक दोष लगाते हुए शिकायत कर दी। अगले दिन तत्कालीन प्रधानाध्यापक रवींद्र सिंह ने बीएसए को लिखे पत्र सफाई दी कि महिला शिक्षामित्र शिक्षण कार्य में मनमाना कर रही थी। समय से स्कूल आने को कहा जाता है तो विवाद कर लेती है। प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने बीएसए को लिखकर दिया था कि शिक्षामित्र चारित्रक दोष में फंसाने की धमकी दे रही है। शिक्षकों ने जांच कर जरूरी कार्रवाई की मांग की थी। तत्कालीन एबीएसए विश्वजीत कुमार ने भी बीएसए को रिपोर्ट दी थी कि चार बार के निरीक्षण में केवल एक बार विद्यालय पर शिक्षामित्र उपस्थित मिली। इतनी शिकायतों को दरकिनार कर शिक्षकों को बलि का बकरा बना दिया गया। यहां तैनात प्रधानाध्यापक रवींद्र सिंह, शिक्षक सुशील उपाध्याय तथा योगेंद्र सिंह को हटा दिया गया। अब केवल शिक्षमित्र और शिक्षक राम समुझ यादव बचे हैं। हालत ऐसी हो गई है कि इस स्कूल पर कोई शिक्षक काम करना ही नहीं चाहते।
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