डोभी : अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बाहुबली आमने-सामने

Jaunpur Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
जौनपुर। डोभी क्षेत्र पंचायत प्रमुख को लेकर दो बाहुबली फिर आमने-सामने हैं। इस बार अविश्वास प्रस्ताव के जरिये दोनों खुद ही अपनी-अपनी कमान संभाले हुए हैं। एक दूसरे को मात देने की कोशिशों के बीच सदस्यों की घेराबंदी जारी है। दोनों के अपने दावों के बीच बीडीसी सदस्यों की जान सांसत मे है। दोनों पक्षों से एक दर्जन से अधिक लोग पाबंद किए जा चुके हैं लेकिन क्षेत्र पर दबाव तनिक कमजोर नहीं हुआ। पुलिस लगातार दोनों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। एलआईयू तथा दूसरी खुफिया एजेंसियां भी डोभी ब्लाक के अविश्वास प्रस्ताव पर लगातार सूचनाएं जुटा रही हैं। राजनैतिक दलों के बड़े चेहरे भी अविश्वास प्रस्ताव पर नजर गड़ाए हुए हैं।
जेल से बाहर आए सुजीत सिंह कछवन 22 दिसंबर 2010 का हिसाब बराबर करना चाहते हैं तो अजय प्रकाश उर्फ केडी सिंह क्षेत्र पंचायत की कुर्सी कतई जाने नहीं देना चाहते। केडी सिंह लगातार दूसरी बार डोभी ब्लाक के प्रमुख निर्वाचित हुए हैं। पंचायतों के चुनाव और क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव के दौरान सुजीत सिंह कछवन जेल में थे।
जेल से ही बीडीसी जीता और जेल से ही क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव भी लड़ा था। उस वक्त भी दोनों में जबरदस्त तनातनी थी लेकिन सुजीत जेल में होने के नाते ज्यादा तनाव वाला माहौल नहीं था। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर इस वक्त ज्यादा तनाव देखा जा रहा है। दोनों इन दिनों क्षेत्र में बीडीसी सदस्यों को संपर्क में हैं। दोनों ओर से करीब एक-एक दर्जन बीडीसी खुलकर भी घूम रहे है। इन पर एक दूसरे के करीबी होने का ठप्पा लग चुका है। ऐसी स्थिति में ऐसे लोग घर भी नहीं बैठ सकते। पिछले कई दिनों से यहां बीडीसी सदस्यों की घेराबंदी तेज है। अभी जल्दी ही में 7 मई को मचहटी की बीडीसी मुराही देवी ने अपने बेटे महेंद्र सरोज के अपहरण का हल्ला मचाया। बाद में पुलिस सक्रिय हुई तो मामला दब गया। 22 दिसंबर 2010 को भी लोकापट्टी की बीडीसी कमला देवी के परिजनों ने अपहरण का हल्ला मचाया था। पुलिस सक्रिय हुई तो कमला देवी बघेरवा मोड़ से सुरक्षित ले जाकर मतदान कराया। इस नाते भी यहां तनाव जैसे हालात बने हुए है।
बता दें कि पिछले चुनाव में कुल 73 बीडीसी सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया था। इसमें केडी सिंह को 37, सुजीत सिंह को 35 तथा एक वोट निरस्त कर दिया गया था। उस दौरान भी दोनों के बीच कांटे का मुकाबला दिखा था और अब तो दिख ही रहा है। दो वोट से चुनाव हारे सुजीत सिंह लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। जेल से बाहर आने के बाद से ही अविश्वास प्रस्ताव का तानाबाना बुना जा रहा था। देर थी तो अविश्वास प्रस्ताव के लिए तय अवधि की। चुनाव 22 दिसंबर 2010 को जरूर हो गया था लेकिन प्रमुखों को शपथ मार्च 2011 में दिलाई गई थी। अविश्वास प्रस्ताव कम से कम एक वर्ष की अवधि के बाद ही लाया जा सकता है। एक वर्ष पूरा होते ही सुजीत ने आधे से अधिक बीडीसी सदस्यों के हस्ताक्षर कराकर डीएम को अविश्वास प्रस्ताव की प्रति सौंप दी। डीएम ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के लिए 23 मई की तिथि तय कर दी है। इसी तिथि को लेकर डोभी ब्लाक का पारा इन दिनों चढ़ा हुआ है। खुफिया एजेंसियों से लेकर समूचे जिले की नजर डोभी के अविश्वास प्रस्ताव पर है। पुलिस भी राउंड द क्लाक दोनों की निगरानी कर रही है।

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