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37 साल पहले भी हुई थी पुलिस से भिड़ंत

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Mon, 17 Feb 2020 12:27 AM IST
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26 जनवरी 2019 को प्रकाशित खबर की पीडीएफ।
26 जनवरी 2019 को प्रकाशित खबर की पीडीएफ। - फोटो : ORAI
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एट (जालौन)। थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात पुलिस और नशेबाजों के बीच भिड़ंत का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले करीब 37 साल पूर्व भी एट कस्बा पुलिस और पब्लिक की भिड़ंत से धधक चुका है।
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क्षेत्रीय बुजुर्गों ने बताया कि 1983 में कस्बे में एक कुल्फी वाले की सिपाही से मामूली कहासुनी भारी बवाल में तब्दील हो गई थी। तब इलाकाई लोगों और कई थानों की पुलिस के बीच जमकर हाथापाई हुई थी। एक हफ्ते तक कस्बे की सभी बाजारें बंद रही थीं। राजनैतिक दलों ने भी धरना प्रदर्शन कर आंदोलन किया था। इसके बाद एट और कोटरा थाने के लगभग एक दर्जन दरोगा और सिपाही निलंबित कर मामले को शांत कराया गया था।
इसी तरह नदीगांव में बीते साल 25 जनवरी को हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस पर गांववालों ने कुत्ते छोड़ दिए थे। पुलिस के साथ जमकर मारपीट और फायरिंग भी हुई। आखिर में हिस्ट्रीशीटर के साथी उसे पुलिस के चंगुल से छुड़ा ले गए। जिसे अभी तक पुलिस दोबारा नहीं पकड़ पाई। इसी तरह बीते साल कोंच की सुरही चौकी पुलिस की भी पब्लिक से भिड़ंत हुई थी। जिसमें भी पुलिस को पीटा गया था। इसी तरह जालौन और कदौरा थाना पुलिस की बीते पांच सालों से तीन बार पब्लिक से भिड़ंत हुई और पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा।
हाल ही के कुछ मामलों में नजर डाली जाए तो 11 फरवरी को कोंच के महंतनगर मोहल्ले में पुलिस जब जुआ के आरोप में युवक को पकड़कर ले जाने लगी तो महिलाओं ने सिपाहियों पर हमला बोलते हुए उनके बिल्ले तक नोंच लिए थे। उरई कोतवाली में चार दिन पूर्व ही ठीक एट की घटना की तरह दो पक्षों के विवाद के बीच पहुंची शहर कोतवाली पुलिस को भी भीड़ ने पीटा था। यहां भी दरोगा को मामूली चोटें आई थी लेकिन पुलिस ने मामले में अभी तक कोई भी लिखा पढ़ी नहीं की। 2015 में भी शहर में गैर जनपद में तैनात दो सिपाहियों की बाजार में भीड़ ने पिटाई कर दी थी। जबकि इसी करीब छह साल पूर्व भी उरई कालपी रोड पर स्थित दुकान के व्यापारी से हुई कहासुनी में गोली चली थी, जिसमें एक सिपाही को जान से भी हाथ धोना पड़ा था।
गांव का प्रधान भी नदारद, ढूंढ रही पुलिस
एट। शनिवार को घटना के वक्त मामला कुछ शांत होने के बाद पुलिस ने जब बिलाया गांव के प्रधान को बुलवाने के लिए सिपाही उसके घर भेजे तो वह सामने नहीं आया। इसके बाद से ही गांव का प्रधान नदारद बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के लिए प्रधान को बुलाया जा रहा है लेकिन उसका मोबाइल भी अब स्विच आफ हो गया है। उधर घायल दरोगा को देखने के लिए रविवार की सुबह मथुरा से उसके परिवारवाले भी मेडिकल कालेज पहुंचे।
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