वायु प्रदूषण की भरमार, नियंत्रण की दरकार

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Wed, 28 Oct 2020 11:15 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
उरई। सर्दी का मौसम शुरू होते ही शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण से सांस के रोगियों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। हाईवे पर दौड़ते ट्रक, कच्ची सड़कों से उड़ती धूल गर्द और उस पर जगह-जगह जलाया जाता कूड़ा व पराली आदि इसके कई कारण हैं लेकिन वायु प्रदूषण पर लगाम के लिए कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही। न तो प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई हो रही है और न ही पराली व कूड़ा जलाने पर।
विज्ञापन

हैरत की बात तो यह है कि जनपद में वायु प्रदूषण का स्तर कितना है और इसे कैसे कम किया जा सकता है, इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई विभाग और उसका अधिकारी भी नजर नहीं आता। यही कारण है कि जनपद में प्रदूषण का स्तर साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। सर्दी के दिनों में धुंध के कारण वायु प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ जाता है। सबसे अधिक दिक्कतें उनकी है, जिनके घर मकान हाईवे या ऊबड़-खाबड़ सड़कों के आसपास है। पूरे दिन इन इलाकों में धूल और धुंए की चादर सी छाई रहती है।
- आग लगाकर कूड़े का निस्तारण
शहर में नगर पालिका की ओर से उठाया जाने वाला कूड़ा कालपी रोड और झांसी रोड हाईवे पर एकत्र किया जाता है, निस्तारण का कोई प्लांट न होने के कारण आखिर में कूड़े के ढेर को आग के हवाले कर दिया जाता है। ऐसे में हाईवे से गुजरने वाले लोगों को धुएं की परेशानी से दो चार होना पड़ता है।
ट्रकों सेे धूल के गुबार, सांस लेना दुश्वार
कालपी, कदौरा, उरई राठ मार्ग, माधौगढ़, रामपुरा आदि ऐसे इलाके हैं, जहां के करीब आठ महीने मौरंग के ट्रकों की कतारें दिखाई देती है। इन क्षेत्रों में कहीं हाईवे है तो कहीं सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं है। ऐसे ट्रकों के टायरों से उडने वाली धूल से वहां रहने वालों के घर मकान सब सराबोर हो जाते हैं। खिड़की दरवाजे खोलकर सांस लेना दुश्वार रहता है।
बाजारों में जहर उगलते जनरेटर
शहर की प्रमुख बाजार घंटाघर, स्टेशन रोड, मौनी मंदिर, बजरिया, अंबेडकर चौराहा, माहिल तालाब, पीली कोठी, जिला परिषद, जालौन चुंगी आदि में गर्मी के दिनों में तो पूरे दिन ही जनरेटर धुंआ उगलते रहते हैं। इनके कारण वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों ही लोगों के लिए समस्या बना रहता है। पालिका भी कभी इन जनरेटरों को हटाने का प्रयास नहीं करती है।
अस्पतालों का कचरा भी बनता है समस्या
यूं तो जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज समेत सभी गांव कस्बे के सीएचसी व पीएचसी के लिए झांसी से कूड़ा उठाने वाली गाड़ी आती है। फिर भी कई गांव कस्बे ऐसे हैं, जहां मेडिकल कचरा खुले में ही जला दिया जाता है। इससे भी प्रदूषण फैलने का खतरा बना रहता है। हाल ही में रामपुरा में बड़ी मात्रा में दवाइयां लावारिस हालत में पड़ी मिली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X