बंद कमरे में लटके मिले दम्पति के शव, हड़कंप

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 11:58 PM IST
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माधोगढ़ में मृतक रामदुलारे की फाइल फोटो
माधोगढ़ में मृतक रामदुलारे की फाइल फोटो - फोटो : ORAI

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संवाद न्यूज एजेंसी
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माधौगढ़। बंद कमरे में अधेड़ दंपति के शव पंखे के हुक से साफी के सहारे लटके मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। तीन दिन से कमरे का दरवाजा न खुलने पर गांव के लोगों ने ही मामले की जानकारी दिल्ली में मजदूरी करने वाले दंपति के लड़कों को दी। मौके पर पहुंचे बेटों ने दरवाजा तोड़ा तो उन्हें माता-पिता के शव एक ही हुक के सहारे लटके मिले। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस फिलहाल मामले को सुसाइड ही मान रही है। इंस्पेक्टर बीएल यादव का कहना है कि फिलहाल तो मामला सुसाइड का ही लग रहा है लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जाएगा।
कोतवाली थाना क्षेत्र के गांव लक्ष्मनपुरा निवासी रामदुलारे दोहरे (55) पुत्र रामचरन व पत्नी सुशीला (52) गांव में ही रहकर खेती किसानी करते थे। रामदुलारे के पास करीब आधा बीघा खेती है। वहीं रामदुलारे के बेटे वीर सिंह , नीलू , अजय दिल्ली में रहकर मजदूरी करते है। पड़ोसियों के अनुसार रामदुलारे के घर का तीन दिन से दरवाजा नहीं खुला था, मकान से बदबू आ रही थी। जिससे उन लोगों को संदेह हुआ। पड़ोसियों ने मामले की जानकारी तीनों बेटों को फोन से दी। सूचना मिलते ही सोमवार को तीनों बेटे गांव पहुंचे और दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। संदेह होने पर ग्रामीणों की मदद से दरवाजे को तोड़ा गया, तो अंदर उन्हें माता पिता के शव लटके मिले। बेटों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे सीओ वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, कोतवाल बीएल यादव ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम भेज दिया है। कोतवाल बीएल यादव का कहना है कि शवों को देख कर लगता है कि तीन पहले आत्महत्या की गई हो, फिलहाल जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पता मौत के कारणों का पता चल सकेगा। अभी तक बेटों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
पारिवारिक विवाद भी हो सकता है कारण
पुलिस सूत्रों की माने तो दोनों पति-पत्नी तीन तीन शादीशुदा बेटों के बाद भी गांव में अकेले रहते थे। इस कारण भी वह परेशान रहते थे। बेटे बाहर रहकर कमाते थे, लिहाजा परिवार भी साथ रखते थे। जबकि दंपति चाहते थे कि कोई तो बेटा बहू उनके साथ भी रहे। इसको लेकर सभी के बीच अंदर ही अंदर कुछ कहासुनी भी चल रही थी।
बिठूर ले जाने की इच्छा रही अधूरी
बेटे वीर व नीलू ने बताया कि पिता व मां को दशहरा पर बिठूर गंगा स्नान के लिए ले जाने की बात हुई थी। फिर अचानक कुछ काम आ गया, जिस कारण वे लोग आ नहीं पा रहे थे। तभी अचानक पड़ोसियों की सूचना आ गई। क्या पता था कि अब कभी माता पिता को जीवित ही नहीं देख पाएंगे। बेटों के मुताबिक कई बार उन लोगों ने माता-पिता को अपने साथ रहने के लिए भी कहा लेकिन वह राजी नहीं हुए।
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