सिर्फ आलीशान बिल्डिंग, इलाज करने वाले नदारद

Jalaun Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। करोड़ों की लागत से बना कालपी रोड स्थित मेडिकल कालेज जनता के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां चिकित्सकों की स्थाई तैनाती नहीं हुई है। संविदा पर या संबद्ध किए गए डाक्टर ही यहां यदा कदा आते हैं। इससे दूर दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। बाहर से लकदक दिखने वाला मेडिकल कालेज मरीजों के लिए बेमतलब है।
इस मेडिकल कालेज की स्थापना सपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2007 में की थी लेकिन सत्ता की चाबी बसपा के हाथ चली गई तो उस समय मुख्यमंत्री मायावती ने डा.राममनोहर लोहिया मेडिकल कालेज का नाम मान्यवर कांशीराम मेडिकल कालेज रख दिया। यह नहीं बांदा के एक कद्दावर बसपा नेता ने मेेडिकल कालेज की न्यूरोलाजी फैकल्टी उरई से अपने यहां बांदा स्थित मेडिकल कालेज स्थानांतरित करवा ली। बस यहीं से मेडिकल कालेज के दुर्दिन शुरू हो गए। यहां तैनात चिकित्सक नर्स व स्टाफ भी अपने भविष्य को लेकर चिंतत हो गए और उन्होंने तबादले करवा लिए। इस साल सपा दुबारा सत्ता में आई तो पिता के सपने को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साकार करने का बीड़ा उठाया लेकिन आज तक निर्धारित 159 चिकित्सकों की नियुक्तियां नहीं हो र्पाइं।
आज जब अमर उजाला टीम मेडिकल कालेज के बाह्य रोगी विभाग में पहुंची तो वहां अजीब सी खामोशी थी। मरीज आ रहे थे, लेकिन चिकित्सकों के खाली चैंबर उनकी लापरवाही की गवाही दे रहे थे। नेत्र विभाग, बाल रोग विभाग, डेंटल विभाग सहित तमाम चिकित्सकों के चैंबर में सिर्फ पंखे चल रहे थे। एक कक्ष में सर्जन डा.बलराम तो दूसरे कमरे में डा. निधि मरीजों का इलाज कर रहे थे। डा.बलराम ने बताया कि रोजाना तकरीबन 600 से 650 बाह्य रोगी आते हैं। वह टीम के साथ मरीजों का उपचार करते हैं। दवा पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन चिकित्सकों की कमी खलती है।
इसके बाद टीम जब प्राचार्य डा.आनंद स्वरूप के कार्यालय पहुंची तो प्राचार्य कक्ष में भी ताला पड़ा था। जब अधीनस्थों से पूछा तो बोले साहब आते ही होंगे। टीम ने लगभग 12.30 बजे तक इंतजार किया लेकिन प्राचार्य नहीं आए। तभी आगरा के रहने वाले चिकित्सक जो यहां अटैच हैं, डा. अशोक अग्रवाल आए। उन्होंने बताया कि उनकी यहां तीन दिन ड्यूटी रहती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कालेज में 159 चिकित्सकों के पद हैं लेकिन तैनाती सिर्फ प्राचार्य की है। वह व प्राचार्य शासन से चिकित्सकों की तैनाती की मांग कर रहे हैं।

कौन है आशीष?
उरई। मेडिकल कालेज में तैनात आशीष अवस्थी कौन है जो बिना फार्मेसिस्ट की डिग्री के दवा वितरित करता है। जब अमर उजाला की टीम उनकी तलाश में दवा वितरण कक्ष पहुंची तो वह खबर लग जाने के कारण इधर-उधर हो गए। इस बाबत जब इस चिकित्सकों से बात की गई तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।

एक्सरे मशीन पर टेक्नीशियन नहीं
उरई। मेडिकल कालेज में एक्सरे मशीन तो है लेकिन कोई टेक्नीशियन न होने से वह मरीजों के लिए बेकार साबित हो रही है। मरीजों को एक्सरे के लिए भटकना पड़ता है।

सर्जन दे रहा है सिर्फ खांसी, बुखार की दवाएं
उरई। मेडिकल कालेज में तैनात सर्जन डा.बलराम ने बताया कि वह व उनकी टीम सिर्फ सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार पीड़ितों का ही इलाज कर पाते हैं क्योंकि स्टाफ व संसाधनों की कमी गंभीर रोगों के इलाज में बाधक है। इसी कारण वह कोई आपरेशन नहीं कर पाते हैं।

कैसा है रोगियों का हाल
उरई। मेडिकल कालेज आने वाले मरीजों का बुराहाल है। जगम्मनपुर निवासी सोनेलाल ने बताया कि वह कान के दर्द से परेशान है। तकरीबन 60 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कालेज पहुंचा, लेकिन यहां कोई विशेषज्ञ डाक्टर न होने से अब वह निजी चिकित्सक के यहां इलाज कराएगा। ऐसे कई मरीज और भी हैं जो जो प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज कराने को मजबूर हैं।

जूनियर डाक्टरों को नहीं मिलता हस्ताक्षर रजिस्टर
उरई। मेडिकल कालेज के उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना भी टेढ़ी खीर है क्योंकि चाहे प्राचार्य हों या अटैच प्रवक्ता, यह रजिस्टर उन्हीं की देखरेख में रहता है जिससे प्रशिक्षु चिकित्सक उपस्थित रहने के बावजूद उस पर हस्ताक्षर नहीं कर पाते हैं। एक प्रशिक्षु चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।

एनसीआई से नहीं हो पा रही तैनाती
उरई। इन अव्यवस्थाओं पर सपा सांसद घनश्याम अनुरागी ने कहा कि राजकीय मेडिकल कालेज में चिकित्सकों की तैनाती मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया से नहीं हो पा रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है, शीघ्र ही चिकित्सकों की तैनाती होगी और यह बेहतर मेडिकल कालेज साबित होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वादा किया है कि मेडिकल कालेज को अगले शैक्षिक सत्र से बेहतर सुविधाओं से लैस कर दिया जाएगा।

कई निर्माण धन के अभाव में लटके
उरई। राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय मेडिकल कालेज को कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने 388 करोड़ की लागत से बनवाया है। इसमें शैक्षणिक अस्पताल, प्रशासनिक भवन, एकेडेमिक ब्लाक, लेक्चर ब्लाक, आडिटोरियम परीक्षा हाल, जिम्नेजियम भवन, बैंक, शापिंग ब्लाक, वर्कशाप, लाइब्रेरी, मोर्चरी, छात्रावास आदि का निर्माण हो चुका है लेकिन धनाभाव में बिजली सब स्टेशन, विद्युतीकरण आदि कार्य अधूरे हैं। इसके पूर्ण होने की तिथि धन की उपलब्धता पर निर्भर है।

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