अब न राजू बेचेगा चने न रामपाल करेगा टेबिल साफ

Jalaun Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। ग्यारह साल का राजू अब चने नहीं बेचेगा। 12 साल का रामपाल भी कैंटीन में काम नहीं करेगा। अब ये स्कूल जाएंगे। बीएसए की पहल पर इन बच्चों के सपनों को तो पंख लग गए, पर जिले में अभी ऐसे तमाम बच्चे हैं जो सर्व शिक्षा अभियान से दूर हैं। ये बच्चे कलेक्ट्रेट में मेहनत मजदूरी करके परिवार पाल रहे थे। बीएसए के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने बच्चों से बात की। पढ़ने लिखने की इच्छा जताने पर उन्होंने दोनों को सरकारी गाड़ी से स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए भिजवा दिया। अब इन्हें वजीफे के साथ ही अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
दृश्य एक: स्थान कलेक्ट्रेट का परिसर, दिन गुरुवार, समय अपराह्न एक बजे। 11 वर्ष का बालक राजू लोहे के स्टैंड पर एक थाली में मसाले वाले चने रखकर आवाज लगा रहा था- ‘मसाले वाले चने खालो बाबूजी मजा आ जाएगा’।
दृश्य दो: कलेक्ट्रेट परिसर में ही चाय, समोसे, भजिया की कैंटीन में लगभग 12 वर्ष का बालक रामपाल तेजी से ग्राहकों को चाय, समोसा वितरित कर रहा था। बीच बीच में ग्राहकों के जूठे बर्तन भी साफ करता जा रहा था। प्रदेश शासन तथा जिला बेसिक शिक्षा विभाग एक ओर सर्व शिक्षा अभियान चल रहा है वहीं जिला प्रसाशन के परिसर में ही दो निरक्षर बच्चे मेहनत मजदूरी करके सर्व शिक्षा अभियान की पोल खोल रहे थे।
अमर उजाला टीम ने जब नगर के मुहल्ला लहारिया पुरवा निवासी राजू से बातचीत की तो उसने बताया कि पिता पप्पू आठ साल से किसी संगीन मामले में जिला जेल में बंद हैं। मां सलमा, रोशनी स्कूल में आया का काम करती है। वह मसाला चना बेच कर मां के साथ दो जून की रोटी का इंतजाम करता है। पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछने पर कहा कि कि इतनी घरेलू परेशानियों के बीच वह चाहते हुए भी कभी स्कूल नहीं जा पाया।
रामपाल भी निरक्षर है। वह काशीराम आवासीय कालोनी में मां शांति देवी के साथ रहता है। पिता राधेश्याम पांचाल का तीन वर्ष पहले निधन हो गया था। उसने बताया कि मां दिहाड़ी मजदूर है पर रोज काम नहीं मिलता इसलिए वह कैंटीन में 50 रुपए तथा चाय नाश्ते पर काम करता है। उसकी पढ़ने की बहुत इच्छा थी लेकिन परिस्थितियों ने पढ़ने नहीं दिया। अब तो बस पेट भरने की जुगाड़ में लगा रहता है।
दृश्य तीन: स्थान कलेक्ट्रेट, समय अपराह्न 1.30 बजे। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी वरुण कुमार सिंह डीएम की बैठक में हिस्सा लेने आए। अमर उजाला की टीम ने उन्हें इन मासूम बच्चों के बार में बताया तो उन्होंने कहा कि ऐसे तमाम बच्चों को शिक्षित बनाना चाहते हैं लेकिन वे पढ़ने कहां आते हैं। इस पर राजू बोल पड़ा कि वह तो पढ़ना चाहता है, गरीबी पढ़ने नहीं देती। रामपाल ने भी यही कहा। इस पर बीएसए ने मोबाइल पर अपने अधीनस्थ को बुलाया और सरकारी जीप में दोनों बच्चों को बैठाकर नगर के लहारियापुरवा प्राथमिक स्कूल में दाखिले के लिए भिजवा दिया। दोनो बच्चे हंसते हुए जीप में सवार हुए तो लगा कि उनकी आंखों में कई रंगीन सपने तैर रहे हैं।

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