अब नेट पर दिखेगा किसान का खेत

Jalaun Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। रबी फसलों की बुवाई के लिए कृषि महकमे ने उन्नतशील बीज, खाद के साथ तैयारियां शुरू कर दी है। महकमे ने किसानों को दलहन उत्पादन की नई तकनीक के साथ खेती करने की सलाह देने की व्यवस्था कर ली है। साथ ही किसान का खेत अब नेट पर भी दिखेगा।
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कृषि विभाग के उप निदेशक सैयद बदरे आलम ने बताया कि रबी फसलों की बुवाई का सीजन आ गया है। किसान दस से 15 अक्टूबर के बीच बुवाई शुरू कर देंगे। इस बार तीन लाख 32 हजार हेक्टेयर जमीन पर दलहन, तिलहन आदि फसलों की बुवाई होगी। चना, मटर, मसूर, सरसों के बीज ब्लाक स्तर के बीज भंडारों पर है। इसके अलावा एट, खकसीस में भी बीज व जिप्सम पहुंचा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरसों की उर्वसी व पूसा बोल्ड वैरायटी 30 कुंतल, मटर सफेद, सपना व केपीएमआर 400 का 700 कुंतल, चना, वरदान, पूसा 256 प्रजाति 100 कुंतल, मसूर, डीपीएल 62 व के 75 करीब 470 कुंतल उपलब्ध है। गेहूं की राज 3765 फाउंडेशन प्रजाति का बीज भी भंडारों पर पहुंचा दिया गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार रबी फसलों के क्षेत्र में वृद्धि होने की संभावना है।

उप कृषि निदेशक सैयद बदरे आलम का कहना है कि सरसों के 282 प्रदर्शन, मसूर के 1200, मटर के 900 हेक्टेयर में प्रदर्शन प्रस्तावित किए गए हैं। किसानों के खेतों में उन्नतिशील बीजों के प्रदर्शन में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए जनपद स्तरीय अधिकारी, शासन के अधिकारियों के अलावा मीडिया को भी स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत मटर, मसूर, चना प्रजाति की फसलों के प्रशिक्षण कराए जाएंगे। इस काम में कृषि विभाग भूमि संरक्ष्ण, कृषि रक्षा सहित 132 कर्मचारियों को लगाया गया है। एक कर्मी के खाते में कम से कम आठ प्रदर्शन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों पर विभिन्न योजनाओं से होने वाले प्रदर्शनों की फोटो व वीडियोग्राफी से एक तो फर्जीवाड़ा रुकेगा और किसान के खेत में कौन फसल उगी उसका नेट पर प्रदर्शन कर दिया जाएगा। उप कृषि निदेशक ने बताया किसानों को दस हजार रुपए अनुदान पर दस वाटर पंप, 40 प्रतिशत अनुदान पर सीड ड्रिल, 70 रोटा वेटर भी दिए जाएंगे। रोटा वेटर पर 30 हजार अनुदान देय होगा।
कृषि विभाग किसानों की गणना के काम में जुटा है। किस किसान के खाते में कितनी जमीन है। उसका मोबाइल नंबर क्या है, सब कुछ अब नेट पर दर्ज होगा। लखनऊ से लेकर जिले के अधिकारी किसानों के सीधे संपर्क मेें होंगे। किसानों को उनके मोबाइल पर योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
एसएमएस के जरिए भी उन्हें खेती की जानकारी दी जाएगी। विभाग की योजना है कि अनुदानित योजनाओं का पैसा अब सीधे उनके खाते में पहुंचे। उसे चेक के लिए कार्यालय के चक्कर न काटने पडे़ं। ब्यूरो

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