पहले भी हो चुकी हैं सामूहिक मौतें

Jalaun Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। जिले में इससे पहले भी टीला धसकने की घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। उधर ग्रामीण भी सर्तक नहीं हो रहे हैं। इससे हादसे रुक नहीं रहे हैं।
बीहड़ व ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के बाद मकानों की लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। लगभग हर गांव में पीली मिट्टी की जरूरत पड़ती है। ग्रामीण एक विशेष स्थान को चिन्हित कर अच्छी मिट्टी उठाते हैं। इससे वह कगार या टीला बन जाता है और जो खुदाई के दौरान धसक जाता है जो हादसे का सबब बनता है।
इससे पहले वर्ष 2010 में रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम निनावली में भी टीला धसकने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। तकरीबन 10 वर्ष पूर्व भी कुसेपुरा गांव में ही टीला धसकने से 7 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन ग्रामीणों ने इससे सबक नहीं लिया। लोगों का कहना है कि प्रशासन व ग्राम प्रधान का भी दायित्व बनता है कि वह ऐसे स्थानों को चिन्हित कर टीले ढहाए जिससे हादसे न हों।

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