रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रही हैं पेयजल योजनाएं

Jalaun Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
माधौगढ़(जालौन)। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों को पर्याप्त पानी सप्लाई नहीं हो पा रहा है। इस कारण है कि यहां के अधिकतर पाइप लाइन टूट चुके हैं। कई जगह सालों से मोटर फूंकी पड़ी है, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। विभाग के आला अफसरों की लापरवाही का खामियाजा गांव के बाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है। साथ ही लाखों रुपए की लागत से शुरू की गई पेयजल योजना का भी लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। समस्या निस्तारण के लिए ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
11 अगस्त 1981 को हरौली, डिकौली में पेयजल टंकियों का निर्माण किया गया। इसमें 25 किमी लाइन डालकर रुदपुरा, मिहौनी, गालमपुरा, भगवानपुरा, मढ़ा, मींगनी, भीमनगर, सूपा, नुनाइच, हैदलपुरा, जमरेही, हरौली, डिकौली, बैनीपुरा आदि 42 गांवों में पाइप लाइन बिछा दी गई। देखरेख के अभाव में अब जगह जगह पाइप लाइन टूट चुकी है और कई गांवों को पानी सप्लाई नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता भारत सिंह, मानसिंह, विक्रम यादव, कमल पाल, जयराम, ज्ञान सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि पानी के जुगाड़ में हुए दूसरे क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है।
सुरावली पेयजल योजना वर्ष 1975 में शुरू की गई थी जिसमें 12 गांवों का शामिल किया गया। इसमें कुरसेड़ा, धमना, सुरावली, जाजेपुरा, सुरपतिपुरा, बुढ़नपुरा, रामनगर गांव शामिल हैं। लाखों रुपए खर्च के बाद भी आज तक ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सात सालों से पानी सप्लाई की मोटर फुंकी पड़ी है और टंकी भी टूटी है। गंर्धव सिंह, विजय दीक्षित जानकी शरण, जगराम ने बताया कि काफी शिकायतों के बाद प्रशासन ने दूसरा ट्यूबवेल स्थापित कर दिया गया लेकिन संविदा पर तैनात आपरेटर की लापरवाही, अधिकारियों की अनदेखी के चलते उक्त पेयजल योजना धरासायी हो गई।
कस्बा माधौगढ़ के बाशिंदों को शुद्ध पेयजल देने के लिए अक्टूबर 1975 में दो लाख एवं पांच लाख लीटर की दो टंकियां बनाई गईं। इसको भरने के लिए चार ट्यूबवेल लगवाए गए, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से कई ग्रामीणों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता है। जलसंस्थान के बाबू अशोक शर्मा ने बताया कि इन ट्यूबवेलों को देहात फीडर से जोड़ गया है, लेकिन वहां से पर्याप्त बिजली नहीं मिलती है। इस कारण टंकियां नहीं भर पाती हैं और पानी सप्लाई में परेशानी होती है। अरुण भदौरिया, राकेश, सोनू तिवारी, सुनील गुबरेले, रवि भूषण आदि का कहना है कि सिहारी रोड या चितौरा रोड पर ट्यूवबेल स्थापित हो जाए तो तो ग्रामीणों को पानी मिलने लगेगा।
सरावन पेयजल योजना से 12 गांवों के लोगों को लाभान्वित किया गया लेकिन उचित रखरखाव के चलते शुद्ध पानी देने से सपना हवा हवाई साबित हो गया। वर्तमान में बारह गांव की जगह मात्र सरावन के 137 कनेक्शन धारियों को मिल पा रहा है। जगह जगह लीकेज होने से गंदा पानी आता है। संतोष सिंह, वीरेंद्र सिंह ने बताया कि लीकेज की शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन जलसंस्थान के अधिकारियों ने इस ओर गौर नहीं किया।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरसी पांडेय कहते हैं कि विद्युत विभाग की कमी है और कनेक्शन कम हैं। वसूली को जाने वाले कर्मचारियों को पेयजल आपूर्ति का पैसा नहीं मिलता। वसूली के धन से ही हम विभागीय कार्य पाइप लाइनों का विस्तार कर्मचारियों का वेतन निकालते हैं। धन के अभाव में अभी तक उतना बेहतर पेयजल आपूर्ति नहीं दे पा रहे हैं जितनी जनता की उम्मीद है। वैसे शासन से हमने कुछ विशेष मद से पैसा मांगा है। यदि धन मिला तो सब कुछ ठीकठाक हो जाएगा।

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