असम में हिंसा पर भेजा गया राष्ट्रपति को ज्ञापन

Jalaun Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। मुस्लिम माइनारटीज फेडरेशन के नेताओं ने असम की हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र सरकार व भारतीय जनता पार्टी पर देश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश के दो बडे़ राजनैतिक दल सपा व बसपा की खामोशी पर आश्चर्य प्रकट किया है। इस बाबत राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा गया है।
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शुक्रवार को फेडरेशन के संयोजक युसुफ इश्तियाक के आवास पर हुई बैठक में जाकिर आजमी ने असम की हिंसा के बाद पूर्वी भारतीयों के पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री से हालात सुधारने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। जनता दल यू के प्रदेश महासचिव आमीन खां ने कहा कि ऐसे हालात में प्रधानमंत्री को त्याग पत्र दे देना चाहिए। कांग्रेस के पीसीसी सदस्य रेहान सिद्दीकी ने असम हिंसा देश के लिए दुर्भाग्य पूर्ण है।
इस दौरान उमर मंसूरी, उवेश सिद्दीकी, चुन्ना हुसैन, वासे रहमानी, नईम, जमील अहमद, औराफ अहमद, गुलाब खान, अतीक अहमद, असलम सिद्दीकी, हफीज अहमद, सोहाव खान, गौरी, अराबर अहमद, ताकिर अहमद, हासिम खान, अजीत मंसूरी, अनवार अंसारी, शफीक अंसारी आदि मौजूद रहे।
जालौन प्रतिनिधि के मुताबिक असम में हिंसा के विरोध में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को एसडीएम को ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में असम में केंद्रीय बल भेजे जाने, विस्थापित के पुनर्वास व पीड़ितों को मुआवजे की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि फिरकापरस्त ताकतें एक षड्यंत्र के तहत असम में हिंसा करा रही हैं। ज्ञापन भेजने वालों में समाजसेवी मुहम्मद अशफाक राइन, मु. इरशाद, नौशाद खान, शफीक अहमद, हाजी अतीक, छिदी राइन, आरिफ अंसारी, अलीम खां, मु. साबिर, अब्दुल हाफिज आदि हैं।
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