इफ्तार के बाद मांगी अमन चैन की दुआ

Jalaun Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। गैबूशाह बाबा की दरगाह के पास रोजेदारों को इफ्तार कराई गई। इफ्तार के बाद रोजेदारों के साथ अन्य लोगों ने भी मुल्क में अमन चैन और तरक्की के लिए दुआ मांगी। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से एकता को बल मिलता है। इस मौके पर रामकुमार राजपूत, साबिर खान, माजिद खान, ताहिर भाई, अलीम बेग, राजू, फिरोज, शादाब खान, रफीक, शानू, अफजल, नबीउद्दीन, मुन्ना आदि मौजूद थे।
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कोंच प्रतिनिधि के अनुसार रमजान बरकतों और रहमतों का मुबारक महीना है। इस महीने में जो भी ईमान और यकीन के साथ रोजा रखता है उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह अल्लाह का फरमान है। शहर काजी बशीरउद्दीन बताते हैं कि रोजा जहां इंसान को खाने पीने से रोकता है वहीं बेहूदा बातों, किसी की बुराई, किसी पर तोहमत आदि मढ़ने से भी रोकना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि रोजा इस्लाम के पांच फर्जों में से एक है। रमजान शरीफ का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत व तीसरा दोजख से निजात है। रोजेदारों के लिए अल्लाह जन्नत के आठ दरवाजे खोल देता है। रोजेदार के मुंह की बास मुश्के अंबर से बेहतर है। इस मुबारक महीने में ही कुरान शरीफ नाजिल फरमाया और इसी में वह रात नाजिल की गई जो हजारों रातों से बेहतर है। रोजे के धार्मिक महत्व के साथ और भी व्यवहारिक महत्व हैं, मसलन आधुनिक चिकित्सा पद्घति में रोजा स्वास्थ्य लाभ का बेहतरीन नुस्खा है, रोजा आदमी को धैर्य बनाये रखने की क्षमता भी प्रदान करता है। रोजा इंसान को गुनाहों से दूर रखता है और कयामत में दोजख की आग से बचाए रखेगा।
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