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कालजयी होती है बडे़ वर्ग की पीड़ा पर लिखी रचना

Jalaun Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। समीक्षक रामशंकर मिश्र ने कहा कि रचना वही कालजयी होती है जो समाज के बडे़ वर्ग की भावनाओं और पीड़ा को समेटकर उन्हें मुखरित करती है। जब कवि की कथनी व करनी एकाकार हो जाती है तो कवि का स्वर अधिक प्रभाव छोड़ता है। यही बात कवयित्री डॉ. रेनू चंद्रा के गजल संग्रह ‘मनकही’ में है। श्री मिश्र सोमवार को यहां मंडपम सभागार में डॉ. रेनू चंद्रा के गजल संग्रह ‘मनकही’ की समीक्षा संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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यह गजल संग्रह हाल ही में डायमंड बुक्स ने प्रकाशित किया है। संगोष्ठी का आयोजन नगर की प्रमुख साहित्यिक संस्था पहचान ने किया था। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। श्री त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने रेनू जी की कविताओं को सुना है। उन्हें संवेदनाओं को सलीके से व्यक्त करने की कला में महारथ हासिल है। प्रगतिशील कवि बांदा के केशव तिवारी ने कहा कि ‘मनकही’ का मूल स्वर बेचैनी तथा छटपटाहट है जो व्यक्तिगत न होकर पूरी मनुष्यता के पक्ष में है।

गीतकार विनोद गौतम ने कहा कि डॉ. रेनू चंद्रा ने सभी बहरों में गजल लिखी। वरिष्ठ गीतकार परमात्मा शरण शुक्ल गीतेश ने कहा कि कवयित्री इस बात पर चिंतित है कि आज आमजन के चेहरे पर मुस्कुराहट क्यों गायब होती जा रही है। गजल सृजन केंद्र के निदेशक नासिर अली नदीम ने कहा कि उनकी सभी गजलों में गजल के मान्य नियमों का पूरी सतर्कता के साथ पालन किया गया है। डीवी कालेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम मुकेश ने कहा कि शायरा का मन इंद्रधनुषी है। उसमें जीवन के विविध रंगों का समावेश हुआ है। संस्कृत कवि डॉ. शालिग्राम शास्त्री ने संस्कृत कविता में मनकही के कथ्य और शिल्प की प्रशंसा की।
गोष्ठी में विनोद गौतम, हरीश्याम पारथ, वीणा श्रीवास्तव, रविशंकर मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए। रेनू चंद्रा ने मनकही की कुछ गजलें गाकर सुनाईं। पहचान संस्था की ओर से डॉ. रेनू चंद्रा का सम्मान किया गया। इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती का पूजन व दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संजीव गुप्ता, संतोष, धनीराम ने जन गीत प्रस्तुत किया। अध्यक्ष गिरधरे खरे ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात गजल एवं गीतकार झांसी के अर्जुन सिंह चांद ने किया। उन्होंने गजल संग्रह पर पर्चा पढ़ा।
माया हरीश्याम पारथ ने डॉ. रेनू चंद्रा पर लिखी एक समीक्षा पुस्तक की पांडुलिपि उनके पति डॉ. रमेश चंद्रा सर्जन को भेंट की। माया हरीश्याम पारथ ने संग्रह की एक गजल नारी तेरे पटल पर लिखी यातना, यातना, यातना की विस्तृत समीक्षा की। इस मौके पर केपी सिंह, नाथूराम निगम, केसी दुबे, विवेकानंद श्रीवास्तव, कमलेश शर्मा, केके गुप्ता, रमा गुप्ता, महेश पांडे, संजय दुबे, योगेश चंद्र द्विवेदी, श्याम, मिश्रीलाल, माया सिंह, डालचंद्र अनुरागी आदि मौजूद रहे।

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