गुस्सा भड़का, जेई के मुंह में अड़ाया गंदे पानी का गिलास

Jalaun Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
कोंच (जालौन)। नगर के लिए अभिशाप बन चुकी सीवर समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। हालत यह है कि सीवर की गंदगी जलापूर्ति लाइनों के जरिये लोगों के घरों तक पहुंच रही है। इससे लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। इस विकट समस्या को लेकर चारों तरफ हाहाकार की स्थिति है। जल संस्थान की लापरवाही पर भड़के मुहल्ला सुभाषनगर और गांधीनगर के दर्जनों बाशिंदों ने रविवार को एसडीएम कोंच मोहम्मद गफ्फार को ज्ञापन देकर शुद्घ पेयजल आपूर्ति की गुजारिश की। जेई को साथ लेकर एसडीएम मोहल्लों में पहुंचे तो गुस्साए लोगों ने उनको प्रदूषित पानी जबरन पिलाने का प्रयास किया। एसडीएम ने समझा बुझाकर लोगों को किसी तरह शांत किया।
चार दशक पूर्व कोंच को वरदान के रूप में मिली सीवेज व्यवस्था आज अभिशाप बन गई है। लगभग पैंतीस किलोमीटर लंबी सीवर लाइन रख रखाव के अभाव में इतनी जर्जर हो चुकी है कि सीवर और पेय जल आपूर्ति लाइनें आपस में गड्ड मड्ड हो गई हैं। इससे नगर भर में सीवर की गंदगी से युक्त पानी नलों के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। इससे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। जल संस्थान को कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है और आश्वासन भी तमाम मिले लेकिन समस्या जस की तस है।
इस भीषण समस्या को लेकर उबले मुहल्ला सुभाषनगर और गांधीनगर के दर्जनों लोग आज एसडीएम मोहम्मद गफ्फार के आवास पर सबेरे-सबेरे जा धमके और उन्हें एक ज्ञापन दिया। अवकाश प्राप्त शिक्षणेतर कर्मचारी डालचन्द्र दुवे, मदन रावत, अजय द्विवेदी, उदय प्रकाश, विशाल दुवे, रवीन्द्र, अवधेश रावत, शिवांग दुवे, जगदीश, श्रीनारायण दीक्षित, निप्पू बबेले, गोपीशरण बबेले, अंकुर दुवे, हेमंत दुवे, देवेन्द्र बबेले, अंकुर दीक्षित, जितेन्द्र सोनी, भास्कर दुवे, अतुल श्रीवास्तव, नसीर अहमद, राजदीप आदि ने ज्ञापन में कहा है कि विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रशासन में बैठे आला अधिकारियों को भी कई बार अवगत कराये जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है जिससे नागरिकों को दुर्गंधयुक्त प्रदूषित जल पीने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिकों ने जलसंस्थान के जेई पर आरोप मढ़ा है कि उनकी लापरवाही से शहरियों को गंदगी से युक्त पानी पीना पड़ रहा है।
नागरिकों की इस समस्या पर गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने तत्काल जेई जल संस्थान को तलब कर लिया और उन्हें साथ लेकर मुहल्लों में पहुंचे जहां नागरिक उन्हें देख फट पड़े और नलों से निकला प्रदूषित जल का गिलास उनके मुंह में अड़ा कर उसे पिलाने का प्रयास किया। नागरिकों का कहना है कि जो पानी जल संस्थान के अधिकारी नहीं पी सकते वह नागरिकों को पीने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है।
जल संस्थान भी यह मानता है कि हालात ठीक नहीं हैं और नागरिकों को आपूर्ति किया जाने वाला पानी भी शुद्ध नहीं है। सीवर की छिन्न भिन्न व्यवस्था को लेकर जेई जल संस्थान केपी शुक्ला का कहना है कि क्षत विक्षत लाइनें लाइलाज हो चुकी है और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में वह विभागीय उच्चाधिकारियों को लिख भी चुके हैं। उन्होंने कहा है कि सीवर और पेय जल आपूर्ति की लाइनें कई जगह लीकेज होने और पूरा संजाल बिछा होने की वजह से इसका निदान हो सकना संभव नहीं है। ब्यूरो

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