इस गांव के युवाओं से रिश्ता करना पसंद नहीं

Jalaun Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। जालौन तहसील के ग्राम जगनेवा से पिछले तीन सालों से कोई बारात नहीं उठी। लड़की वाले अपनी बहन, बेटी की शादी इस गांव में करने से बचते हैं। यह गांव नशेड़ियों के गांव के रूप में कुख्यात है। यहां के आधे से ज्यादा युवा स्मैक, गांजा, शराब के नशे के आदी हैं। इनका खामियाजा उन निर्दोष युवाओं को भी कुंवारे रहकर भुगतना पड़ रहा है, जिनका नशे से दूर-दूर का भी वास्ता नहीं है।
जगनेवा गांव जनपद मुख्यालय उरई से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। इसकी आबादी करीब छह हजार है। गांव के बुजुर्ग एवं पुजारी श्याम जी दुबे बताते हैं कि गांव की बदनामी से हम शर्मिंदा हैं। नशे की लत पूरी करने के लिए यह लोग चोरियां करतें हैं। यहां तक कि घर के अंदर या बाहर से छोटी-मोटी चीजें चुराने से नहीं चूकते। लड़कों के रिश्ते तो लंबे समय से आना कम हो गए थे, लेकिन पिछले तीन सालों से तो बारात जाना एकदम बंद हो गया है। दूर-दराज से अगर कोई आता भी है तो आसपास के गांवों से यहां के बारे में सुनकर बाहर से ही लौट जाता है। 30 से 42 साल की उम्र तक के सैकड़ों लड़के हैं, जिनकी शादी केवल इसी वजह से नहीं हो सकी।
गांव में नशा खोरी के चलते कई लोगों की जमीनें बिक गई। स्मैक की लत ने इस कदर जकड़ा कि कई घरों में आज पिता व पुत्र दोनों ही स्मैक के आदी हैं। गांव के शिवकुमार और उनका पुत्र राजेश (दोनों बदले हुए नाम) स्मैक की लत के चक्कर में अपनी 50 बीघा जमीन तक बेच चुके हैं। इसी तरह एक अन्य ग्रामीण अपनी 35 बीघा जमीन स्मैक के नशे में होम कर चुका है। इस तरह से नशे में अपने को बरबाद कर चुके लोगों की लंबी फेहरिस्त है। गांव के नारायण दास शाक्यवार एवं मनमौजी मंसूरी का कहना है कि शुरु में गांव के दोस्तों में स्मैक की छोटी सी पुड़िया देकर कहा कि इसे पियो, इससे ऐसा आनंद मिलेगा जैसे इसके पहले तुमने अपने पूजे जीवन में न पाया होगा। उन्होंने बताया कि स्मैक पीते ही अजीब सा नशा चढ़ा जो पांच छह घंटे तक बना रहता है। नशा उतरते ही फिर से स्मैक की तलब लगती है। नशा न मिलने पर पूरे शरीर में टूटन सी होती है। नशे के आदी रहे वह लोग अपने घर तक का सामान बेच चुके हैं। उन्होंने बताया कि पुड़िया खरीदने को पैसा जुटाने के लिए नशेड़ी किसी का भी सामान चुरा में गुरेज नहीं करता है। उसे तो बस एक पुड़िया स्मैक चाहिए। गांव में चोरी छिपे स्मैक की पुड़िया 50 रुपए मिल जाती है। जबकि गांजा की पुड़िया दस रुपए में मिलती है।
ग्राम जगनेवा में नशा से मुक्ति कराने के लिए ग्राम प्रधान श्यामलता व उनके पति रवीेंद्र पाल सिंह गुर्जर गांव के जागरुक लोगों श्याम जी दुबे पुजारी, नवाब सिंह, परशुराम, बाल किशुन, स्वामी प्रसाद, ओमनारायण पांडेय, गंगा सिंह जादौन, पूरन सिंह ने कहा कि व तथा गांव वाले चाहते हैं कि उनका गांव नशा मुक्त गांव बने। इसके लिए वह लोग अपने स्तर से तो प्रयास कर रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि ऐसी कोई संस्था जो नशे के आदी लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने में मदद करती है, वह भी आगे आए।

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