ठिठका जनजीवन, हर तबके पर टूट रही बिजली की आफत

Jalaun Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। उमस भरी गर्मी से बेचैन जिले के लोग बिजली के नए रोस्टर से उबल पड़े हैं। नौ घंटे की कटौती ने उनका दिन का चैन और रात की नींद छीन ली है। इससे समाज का हर तबका गुस्से से भरा है जो कभी भी बड़े आंदोलन के रूप में फूट सकता है। हालत यह है कि नौ घंटे की कटौती तो हो ही रही है, जर्जर लाइनें और उपकरण भी आफत बने हुए हैं। फाल्ट होने पर दो-चार घंटे के लिए बिजली गुल होना रोज की बात हो गई है। इससे जिले में बिजली के लिए त्राहि-त्राहि मची है। ग्रहणियां, व्यापारी, दुकानदार से लेकर धर्मगुरु तक बिजली के नए शेड्यूल को कोस रह हैं। बिजली कटौती के चलते पानी की भी विकराल समस्या खड़ी हो रही है। इससे स्कूली बच्चे व कामकाजी लोग खासे प्रभावित हो रहे हैं। पारीछा व माताटीला थर्मल पावर प्लांट लगने के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र को कटौती मुक्त रखा गया था लेकिन इस समय इसी क्षेत्र मेें बिजली के लिए हायतौबा मची है।
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बिजली विभाग ने जो नया रोस्टर लागू किया है, उसके मुताबिक दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक और रात दो बजे से सुबह छह बजे कटौती की जा रही है। कटौती के लिए यह समय हर तरह से अव्यवहारिक है। इसके अलावा लोकल फाल्ट व इमरजेंसी रोस्टिंग भी लोगों को हलाकान किए है। हालत यह है कि बिजली के बिना लोग देर रात छतों पर टहलते दिखते हैं। गर्मी से बिलबिलाते बच्चों के रोने की आवाज करीब-करीब हर घर से सुनाई देती है।
राजेंद्र नगर निवासी ग्रहणी अंजना श्रीवास्तव ने बताया कि बिजली ने तो पूरी दिनचर्या ही गड़बड़ी दी है। रात में नींद पूरी नहीं होती है और सुबह पानी न आने से बच्चों को स्कूल भेजने में दिक्कत होती है। बेल्डिंग कारोबारी तिलक सिंह राजपूत, युनुस खान, शम्मी आदि ने बताया कि अब तो कटौती ने उनका धंधा ही चौपट कर दिया है। मात्र दो या तीन घंटे ही काम कर पाते हैं। इससे ग्राहक उनसे झगडे़ पर आमादा हो जाता है। दुकानदार प्रफुल्ल बाथम, धर्मेंद्र चौरसिया, कपड़ा व्यापारी स्वामी शरण गुप्ता ने बताया कि बिजली कटौती से दुकानदारी पर असर पड़ रहा है। यहीं नहीं नींद पूरी न होने से सेहत बिगड़ रही है। बच्चे भी बीमार हो रहे हैं। फ्लोर मिल संचालक रामेंद्र सिंह ने बताया कि रोस्टिंग के अलावा भी अतिरिक्त कटौती से धंधा चौपट हो गया है।
भीषण गर्मी में अंधाधुंध बिजली कटौती से लोग बिलबिला गए हैं। लोगों ने सरकार से सवाल किया है कि जब प्रदेश एक है तो बुंदेलखंड वासियों से सौतेला व्यवहार क्यों। लोगों ने इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद की तर्ज पर यहां भी भरपूर बिजली दिए जाने की गुहार लगाई है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह सौतेला व्यवहार जारी रहा तो बुंदेलखंड क्षेत्र के लोग बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।
बिजली कटौती के बदले रोस्टर से धर्मगुरु भी खासे खफा हैं. आज जब इस बाबत मुस्लिम धर्म गुरु शहरकाजी शकील बेग, रहमानी शाही, इमाम हाफिज शहादत हुसैन, इरशाद आदि से बात की गई तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। इसमें अकीदतमंद रोजा रखेंगे। भीषण कटौती से सहरी व अफ्तार में खासी परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि केवल इटावा व कन्नौज के लोगों ने ही सपा की सरकार नहीं बनवाई है, इसमें हम लोगों का भी योगदान है। फिर हम लोगों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों। अगर बिजली कटौती तरीके से नहीं की गई तो बुंदेलखंड के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
बिजली का शेड्यूल बदलवाने की मांग को लेकर गुरुवार को सत्ताधारी दल के जिलाध्यक्ष सोहराब खान ने जिलाधिकारी मनीषा त्रिघाटिया को ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया है कि 21 जुलाई से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। इसमें मुस्लिम भाई रोजा रखते हैं। उनकी सुविधा के लिए बिजली, पानी व साफ सफाई के खास इंतजाम किए जाएं। बिजली आपूर्ति का ऐसा रोस्टर जारी किया जाए, जिससे लोगों को दिक्कतें न झेलनी पड़ें। डीएम ने कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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