कुठीला गांव की दशा देख तोड़ देते हैं रिश्ता

Jalaun Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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कुठौंद (जालौन)। कुठौंद विकास खंड का गांव कुठीला आज भी विकास की बाट जो रहा है। इस गांव में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। हालत यह है कि ढाई किलोमीटर का संपर्क मार्ग न होने से ग्रामीण बरसात में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। यही नहीं रात में बीमार होने पर उनकी मुसीबत और बढ़ जाती है। गांव की हालत देख कई मर्तबा लोग यहां रिश्ता करने से भी इनकार कर देते हैं। आज कीचड़ से होकर जब संवाददाता इस गांव में पहुंचा और लोगों से बातचीत की तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। बोले कि आज तक इस गांव में शासन का कोई हाकिम कभी सुध लेने नहीं आया। नेता जी भी बस वोट मांगने आते हैं। तकरीबन 2500 की आबादी वाला यह गांव अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
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ग्रामीण राममोहन मिश्रा, डालचंद्र, आशाराम, प्रमोद कुमार आदि ने बताया कि अन्य गांवों का विकास देखकर उन्हें अफसोस होता है कि आखिर शासन प्रशासन हमारे गांव की सुधि क्यों नहीं ले रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर बरसात के मौसम में रात में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसको कुठौंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना मुश्किल पड़ता है। कई लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। इसके अलावा प्रसव के लिए भी महिलाएं पहले से अपने रिश्तेदारी में चली जाती हैं क्योंकि यहां खासी दिक्कतें होती हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालय तो है लेकिन बरसात में शिक्षक शिक्षिकाएं पढ़ाने नहीं आ पाते हैं। जिससे यहां के बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है। ग्रामीण मर्याद सिंह यादव ने बताया कि पिछले वर्ष उसने अपनी बहन का रिश्ता अच्छे घर में किया था। दोनों पक्ष तैयार थे लेकिन लड़का पक्ष जब गांव आया तो यहां के मार्ग को देखकर बहन का रिश्ता तोड़ दिया। ग्रामीण प्रमोद ने बताया कि इस गांव का प्रमुख व्यवसाय कृषि है जहां के लोग पिछड़े हैं। अगर इस गांव में संपर्क मार्ग बन जाए तो काफी सहूलियत हो जाएगी। किसान अपने जानवरों का दूध व सब्जी शहरों में बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं।
ग्राम प्रधान अंजली गौतम का कहना है कि उन्होंने गांव में संपर्क मार्ग, सीसी रोड व स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है, उम्मीद है कि युवा मुख्यमंत्री इस बदहाल गांव का उद्धार जरूर करेंगे।
कुठीला गांव के पूर्व प्रधान जितेंद्र यादव ने बताया कि वर्ष 2005 में उन्होंने बमुश्किल संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए पैरोकारी कर धन स्वीकृत करवा लिया था लेकिन संपर्क मार्ग के टेंडर नहीं हो सके, लिहाजा पैसा वापस चला गया। वह वर्तमान प्रधान के साथ हैं, गांव के विकास में हरसंभव मदद को तैयार हैं।
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