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बारिश के पानी का संचयन जरूरी

Jalaun Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। वर्षा जलसंचयन के लिए किसान व सरकारी विभाग ठोस प्रयास करें। यह बात जिलाधिकारी मनीषा त्रिघाटिया ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कही। वे भू जल सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।
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उन्होंने कहा कि वर्षा का पानी खेत में हो तो भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज होता है। भूगर्भ जल का अत्याधिक दोहन हो रहा है। जल संरक्षण के लिए लोगों को चाहिए कि वह पुराने कुंओं, तालाबों के पानी का संरक्षित कर उन्हें सुरक्षित करें। कृषि कार्यों में जल की खपत कम करने के लिए किसान कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को बोयें। सिंचाई के लिए स्प्रिकंलर सिस्टम को अपनाया जाना चाहिए। यदि पानी को संरक्षित करने के प्रयास नहीं किए तो भविष्य में हमें एक एक बूंद को तरसना पड़ सकता है। बुंदेलखंड में वैसे ही जल की कमी है लेकिन आज जरूरत उसके प्रबंधन की है। हमारा प्रयास होगा कि सरकारी भवनों में रूफ रैन वाटर हार्वेसटिंग सिस्टम लागू हो ताकि बारिश का पानी सीधा जमीन में वापस हो। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या के समाधान के लिए सरकारी प्रयास ही काफी नहीं है। हमें जल संरक्षण व प्रबंधन के लिए इसे जन आंदोलन बनाने की जरुरत है। डीएम ने जनजागरण के लिए बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में जलसंरक्षण पर गोष्ठी, सेमिनार आयोजित करने की भी सलाह दी। कहा कि यह भी जन जागरण का एक सशक्त माध्यम है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी एएन सिंह, पंकज कुमार, चंद्रवीर गुप्ता, अखिलेश सचान, सत्यप्रकाश आदि मौजूद रहे।

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