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रेजगारी के लिए चखचख, लोगों को लग रही चपत

Jalaun Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। छोटी बचत के रूप में बच्चों की गुल्लक में खनखनाने वाली रेजगारी का यहां भारी टोटा हो गया है। हालत यह है कि एक, दो, पांच रुपए के सिक्के तो जैसे बाजार से गायब ही हो गए हैँ। इससे बाजार में दुकानदारों और ग्राहकों के बीच झगड़े की नौबत बनी रहती है। दुकानदारों के फुटकर पैसे की किल्लत बताने पर लोगों को न चाहते हुए भी गैर जरूरी चीजें खरीदनी पड़ती हैं। इससे महंगाई के इस दौर में लोगों को प्रतिदिन दस-बीस रुपए बर्बाद करने पड़ते हैं, परेशानी होती है सो अलग। दूसरी ओर बच्चों के गुल्लक न भर पाने से परिवार की छोटी बचत शून्य हो गई है। कुछ लोग रेजगारी जमा करके इसका बेजा लाभ ले रहे हैं।
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इन दिनों हर जगह हर दुकान पर एक, दो व पांच के सिक्कों के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। बाजारों में कुछ लोग इसको व्यवसाय बनाए हुए हैं। आपको एक-एक के सौ रुपए के सिक्के चाहिए तो 15 रुपए अतिरिक्त देने पड़ेंगे। 2 रुपए के सिक्कों के लिए 10 रुपया व पांच रुपए के सिक्कों के लिए भी 10 रुपए ज्यादा देने पडे़ंगे। राजेंद्र नगर निवासी हरीश जायसवानी व मनोज कुमार कहते हैं कि किसी भी मेेडिकल स्टोर पर दवा लेने जाओ और बिल यदि 172 रुपए का बना तो दुकानदार तीन रुपए वापस करने के बजाए तीन विक्स की गोली थमा देते हैं जो हमें मजबूरी में लेनी पड़ती है।
गोपाल गंज निवासी बलराम पाटकार व दादूपुरा मुहल्ला निवासी नईम कहते हैं कि किसी भी विभाग में अगर आप बिल देने जाते हैं तो वहां पर कभी भी एक, दो या पांच रुपए वापस नहीं किए जाते हैं। इससे आम उपभोक्ता को अतिरिक्त पैसा फुटकर न होने की दशा में छोड़ना पड़ता है क्योंकि हर जगह भीड़ में लंबी लाइन होने से घंटों इंतजार के बाद बिल जमा करने का नंबर आता है। इसलिए दो चार रुपए फुटकर के च्क्कर में लोग पड़ता ही नहीं चाहते। सिंधी कालोनी निवासी अशोक होतवानी व हजारीपुरा निवासी रामा देवी कहतीं हैं कि परचून की दुकान पर सात रुपए का सामान लेने पर सिक्कों के अभाव मेें तीन माचिस जबरदस्ती लेनी पड़ती हैं। बस व ट्रेन के टिकटों में भी दो चार रुपए फुटकर सिक्कों के अभाव में हमेशा छोड़ने पड़ते हैं। नववधु की विदा के समय व अंतिम शव यात्रा पर उछालने के लिए सिक्कों की तंगी भी परेशानी का सबब बनी है।
इस बावत भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक डीडी वर्मा का कहना है कि अप्रैल 2011 में सिक्के आए थे तब से अभी तक नहीं आए हैं। वैसे अमूूमन वर्ष में एक बार अप्रैल में व दूसरी बार जुलाई या अगस्त में सिक्के आते हैं। इस वर्ष भी बीस से 25 लाख की डिमांड भेजी है। सिक्के आते ही बांट दिए जाएंगे।

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