सूखे की आशंका से अन्नदाता की धुकधुकी बढ़ी

Jalaun Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। बुंदेलखंड के किसानों से शायद उनकी किस्मत रुठ गई है। वर्ष 2000 से 2005 तक सूखे का दंश झेल चुके किसानों के दिलों की धड़कनें जुलाई शुरू होेने के बाद बारिश न होने से तेज हो गई हैं। अन्नदाता आसमान की ओर निहार रहे हैं, लेकिन आसमान से एक बूंद भी नहीं बरस रही है।इससे जिले में करीब 75 हजार हेक्टेयर भूमि खाली पड़ी है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो किसान के हाथ से खरीफ की फसल जाती रहेगी।
बुंदेलखंड की कृषि भूमि का लगभग 80 प्रतिशत भाग वर्षा पर आधरित है, लेकिन अब तक इंद्रदेव की कृपा
किसानों पर नहीं हुई है। आसमान से बरसती आग ने किसानों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। जिले के डकोर, माधौगढ़, रामपुरा, नदीगांव और कदौरा विकासखंड में किसान बस यही दुआ कर रहे हैं कि अब तो मेघ बरस जाएं। निकाय चुनाव के दौरान जब संवाददाता ने क्षेत्र का दौरा किया तो किसानों का दर्द उभर कर सामने आया। बोहदपुरा के किसान मुकेश चौहान ने बताया वह हर वर्ष खरीफ की फसल पैदा करता थे तथा सब्जी की फसल भी तैयार करते थे। इससे परिवार का भरण पोषण ठीक ढंग से हो जाता था, लेकिन इस वर्ष पूरी जमीन बंजर पड़ी है। अब कहां से गृहस्थी का खर्च चलेगा। यही चिंता उसे सता रही है। यही नहीं कोंच क्षेत्र के अंडा गांव के यशराम द्विवेदी, राजकुमार कौशिक और आनंद स्वरुप कौशिक आदि किसानों ने बताया उनकी मैंथा की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। अगर पानी न बरसा तो अन्नदाता ही भुखमरी की कगार पर होगा। उधर रामपुरा एवं कुठौंद क्षेत्र के लहुसीमांत कृषक राजेंद्र कुमार आदि ने बताया अगर बारिश न हुई तो उन्हें रोजगार की तलाश में प्रदेश से बाहर पलायन करना पड़ेगा। सूखे की विभीषिका की आशंका से अन्नदाता परेशानी में है। उन्हें चिंता सता रही है अगर खरीफ की फसल की बुवाई न हो पाई तो वह रबी की फसल के लिए खाद -बीज कहां से जुटाएंगे। कर्ज में डूबे बोहदपुरा निवासी किसान लाखन सिंह ने दो दिन पूर्व सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली थी।
इंद्रदेव को खुश करने के लिए परेशान किसान अब टोने- टोटे करने लगे है जिससे किसी तरह बारिश हो जाए। कुकरगांव के पूर्व प्रधान आनंद दुबे ने बाकायदा इंद्रदेव को मनाने के लिए साथियों के साथ हवन- पूजन किया। उधर कई अन्य गांवों में भी ग्रामीणों के पूजा- अर्चना और टोने टोटका किए जाने की खबर है।
कृषि वैज्ञानिक डा.राजीव सिंह ने बताया पांच से 20 जुलाई तक खरीफ की फसल की बुवाई होती है। अगर बारिश शुरु हो जाए तो अभी कुछ देर नहीं हुई है। किसान उन्नत किस्म की मूंग और कुम्हड़े की बुवाई का मुनाफा कमा सकते हैं।

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