पूंजीवादी व्यवस्था का अमानवीय चेहरा उकेरा

Jalaun Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। भारतीय जन नाटय संघ ने वैज्ञानिक विचारधारा के अनुसार सामाजिक क्रांति करने वाले कबीर की याद में देवेंद्र शुक्ला द्वारा लिखित और राजपप्पन द्वारा निर्देशित ढाई आखर प्रेेम का नाटक का मंचन किया।
मंगलवार शाम शहीद भगत सिंह साइंस कालेज में मंचित नाटक में मानवीय संवेदनाओं को कुचलने वाली पूंजीवादी व्यवस्था के अमानवीय चेहरे को असरदार ढंग से उभारा गया। नाटक की कथा वस्तु के अनुसार एक युवक गांव से शहर आकर दही बेचता है। बाद में वह दही बेचने की आड़ में अफीम, गांजा, चरस भी बेचता है। मिलावट, सट्टेबाजी, जुआ, बच्चों का अपहरण करके उनको उनके अंग बेचने और देह व्यापार के लिए लड़कियां सप्लाई के धंधे को बढ़ा कर सेठ दही वाला बन जाता है।
नाटक के माध्यम से मानवीय पतन और मूल्यों की गिरावट को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया है। कबीर पंथी की भूमिका सशक्त अभिनय से असरदार बन पड़ी। इस मौके पर दीपक सोनी, अमर गौरव, संतोष, अनुज भदौरिया, यज्ञदत्त त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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