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श्रृद्धालुओं से भरी ट्राली पलटी, पांच की मौत, चौदह घायल

Jalaun Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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रामपुरा(जालौन)। नए ट्रैक्टर का पूजन कराने जा रहे श्रृद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली दतिया जिले के थाना व कस्बा भगुआपुरा के पास गुरुवार की रात पलट गई, जिसमें मौके पर ही पिता पुत्री और मां बेटी समेत पांच लोगों की मौके पर मौत हो गई। चौदह अन्य श्रृद्धालु गंभीर रुप से घायल हो गए जिन्हें ग्वालियर में भर्ती कराया गया है।
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रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम नरौल निवासी जितेंद्र ने बुधवार को नया ट्रैक्टर लिया था। गांव में पूजन के बाद गुरुवार की रात परिवार व रिश्तेदार ट्रैक्टर ट्राली में बैठकर मध्य प्रदेश के दतिया जिले में रतनगढ़ देवी के दर्शन करने जा रहे थे। गंाव का ही चालक कल्लू ट्रैक्टर चला रहा था। गुरुवार की रात तकरीबन 12 बजे जब ट्रैक्टर थाना व कस्बा भगुआपुरा के पास पहुंचा तभी चालक को झपकी आने से तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। ट्रैक्टर के नीचे दबकर जितेंद्र सिंह (40), उसकी बेटी पूनम (22), शिवानी (10) पुत्री अरविंद सिंह, मंजू (35) पत्नी अरविंद निवासीगण नरौल थाना रामपुरा व एक रिश्तेदार शांति (45) पत्नी कुंवर सिंह निवासी धना की गढ़िया जनपद भिंड की मौके पर ही मौत हो गई। ट्राली में बैठे14 अन्य श्रृद्धालु गंभीर रुप से घायल हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष भगुआपुरा ने घायलों को ग्वालियर पहुंचाया। घटना की सूचना जैसे ही नरौल गांव पहुंची तो लोग घटनास्थल पर रवाना हो गए।
वक्त के क्रूर हाथों ने महज 13 साल के भूपेंद्र के सिर से माता के बाद पिता का साया भी छीन लिया। वह उस घड़ी को कोस रहा है जब पिता ने ट्रैक्टर खरीदा था। मां की बीमारी से मौत, फिर पिता व बहन की सड़क हादसे में मौत से भूपेंद्र की तो मानो दुनिया ही उजड़ गई। हादसे की खबर से उसको ऐसा सदमा लगा कि बुत बनकर रह गया।
रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम नरौल निवासी जितेंद्र ने नया ट्रैक्टर लिया और वह परिवारीजनों व रिश्तेदारों के साथ रतनगढ़ देवी मंदिर दतिया गया था जहां जितेंद्र उसकी बेटी पूनम की मौत हो गई। अब घर में मात्र इकलौता पुत्र भूपेंद्र है जिसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वह करे तो क्या करे। शुक्रवार की सुबह जब संवाददाता उनके गांव पहुंचा तो पूरे गांव में मरघट सा सन्नाटा था। जितेंद्र के घर के ऐसी चीत्कारें गूंज रही थीं जिसे सुनकर पत्थर दिल इंसान भी दहल जाएं।
एक पेड़ के नीचे बैठे भूपेंद्र की सिसकियां थम नहीं रही थीं। डेढ़ वर्ष पूर्व मां गुड्डी देवी की मौत के बाद पिता जितेंद्र व बड़ी बहन पूनम ने उसे बडे़ दुलार से पाला था लेकिन अब उसको सहारा देने वाला परिवार में कोई नहीं बचा है। वह कभी आसमान निहारता है तो कभी जमीन कुरेदकर मानो कुदरत से अपने साथ हुई नाइंसाफी का जवाब मांग रहा हो।
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