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मित्र से बढ़कर कोई हितैषी नहीं

Jalaun Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
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उरई(जालौन)। मित्र से बढ़कर दुनिया में कोई हितैषी नहीं होता है। माहिल तालाब पर चल रहे श्रीमदभागवत कथा कार्यक्रम में कथावाचक रामनरेश व्यास ने यह बात कही।
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श्री व्यास ने कहा सच्चा मित्र अपने मित्र को कभी कष्ट में नहीं देख सकता है। मित्र अपने मित्र से कुछ भी नहीं छुपाता है। व्यास जी ने सुदामा चरित्र का विवेचन करते हुए कहा जब दरिद्र सुदामा के यहां खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा तो सुदामा की पत्नी सुशीला ने कहा कृष्ण द्वारिका के राजा है। आप अपने मित्र के पास जाकर उनसे सहायता क्यों नहीं मांगते। इस पर सुदामा ने कहा वह किसी से कुछ मांग कर अपना धैर्य नष्ट नहीं कर सकते। इस पर सुशीला ने सुदामा से कहा आप भगवान श्रीकृष्ण के पास चले जाएं भले ही उनसे कुछ
नहीं मांगें। जब सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारिका जाने लगे तो सुशीला ने उन्हे चावल की पोटली देते हुए कहा राजा से मिलने जाने से पहले उनके लिए भेंट लेते जाएं। जब सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें द्वार पर रोक लिया। जब श्रीकृष्ण को पता चला तो वह द्वार पर आए और सुदामा को देखकर उन्हें छाती से लगाकर अंदर ले गए। राज सिंहासन पर सुदामा को बैठाकर श्रीकृष्ण उनके चरण धोने लगे। सुदामा की दीन दशा देख कर कृष्ण बहुत दुखी हुए। सुदामा की कोख में दबी चावल की पोटली छीनकर वह खाने लगे। कृष्ण ने विश्वकर्मा को आदेश देकर सुदामा की दरिद्रता दूर करने और उनके लिए महल बनाने का आदेश दिया। सुदामा को मालूम भी नहीं चला और कृष्ण ने उन्हें सब कुछ दे दिया। कथा विश्राम पर कथा की पारीक्षित सुधा गोस्वामी ने श्रीमदभागवत पुराण की आरती की। इस अवसर पर महिला और बुजुर्गों समेत भारी संख्या में श्रृद्धालु श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए उपस्थित रहे।
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