चार दिन से एफसीआई के बाहर खड़े गेहूं के बोरों से भरे ट्रक

Jalaun Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। भारतीय खाद्य निगम के कुइया रोड में स्थित गोदामों एवं कार्यालय के बाहर सड़क पर गेहूं के बोरों से भरे ट्रकों की लंबी-लंबी लाइनें पिछले चार दिनों से लगी हैं। गेहूं की खरीद के बाद उसे एफसीआई के गोदामों में रखवाना सरकारी क्रय केंद्रों के ठेकेदारों तथा लाइसेंसी गल्ला आढ़तियों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया है। क्योंकि यदि एफसीआई के पल्लेदार किसी कारण से यदि एक दिन भी ट्रक अनलोड नहीं करते हैं तो एक हजार रुपए की हल्टिंग का चार्ज ट्रक के मालिक को गल्ला व्यापारी और सरकारी क्रय केंद्र के ठेकेदार को देना पड़ता है।
भारतीय खाद्य निगम का गोदाम व कार्यालय नगर के कुइया रोड में स्थित है। पिछले चार दिनों से यहां गेहूं के बोरों से भरे ट्रकों की लाइन लगी हैं। लेकिन एफसीआई में डेलीवेजेज पर सिर्फ 40 पल्लेदार होने के कारण ट्रकों को अनलोड करने का काम बेहद धीमी गति से होता है। पिछले चार दिनों से यहां गेहूं से भरा ट्रक लेकर लाइन में खड़े रहीश ने बताया कि वह कालपी से गेहूं लेकर पिछले चार दिनों से खड़ा हूं। इसी तरह ट्रक चालक अजय ने बताया कि वह चार दिनों से एट फर्म के गेहूं लिए खड़ा है। चालक बृजराज जो मित्तल टेडर्स एट का गेहूं लेकर आए हैं। इसी तरह ट्रक चालक नरेंद्र तथा ट्रक चालक सतीश वाजपेई जो चार दिन भोला ट्रेडर्स उरई का गेहूं का बोरा लिए ट्रक लिए खड़े हैं। उनका नंबर कब आएगा पता नहीं है। उधर ट्रक चालक, सरकारी क्रय केंद्रों के ठेकेदार राघवेंद्र विक्रम सिंह, सुरेंद्र यादव तथा गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी, बासीराम यादव सहित तमाम गल्ला व्यापारी बताते हैं कि भारतीय खाद्य निगम के पल्लेदार बिना दो हजार या 22 सौ रुपए सुविधा शुल्क लिए ट्रक के बोरों की उतराई नहीं करते हैं. जो लोग यह सुविधा शुल्क नहीं देते उनके ट्रक कई कई दिनों तक यूं ही लाइन में खड़े रहते हैं। इस व्यवस्था से आक्रोशित लाइसेंसी व्यापारी व सरकारी क्रय केंद्रों के ठेकेदार कहते हैं कि ये संगठित पल्लेदार जो ज्यादातर बिहारी हैं, हमारी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। उधर पल्लेदार यूनियन के अध्यक्ष अनिल कुमार, शंकर, रामसजीवन, रमेश आदि पल्लेदारों ने बताया कि कोई सुविधा शुल्क नहीं लेते। पार्टी हमारा काम देखकर चाय, ठंडा करा देती है तो बात अलग है। एफसीआई के जिला प्रबंधक देवेंद्र कुमार कहते हैं कि एफसीआई उर के 40 पल्लेदार हैं जो विभागीय स्तर पर डेलीवेजेज पर नो वर्क नो पेपर पर काम करते हैं। उन्हें 171 रुपए प्रतिदिन मानदेय मिलता है। इसी ट्रक चालक या ठेकेदार या गल्ला व्यापारी अन्य किसी से सुविधा शुल्क लेना गैर कानूनी है। शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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