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एफसीआई गोदाम के बाहर बखेड़े की नौबत

Jalaun Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। भारतीय खाद्य निगम के गोदाम के बाहर बखेड़े की नौबत आ गई है। हालत यह है कि विभिन्न सरकारी क्रय केंद्रों से गेहूं से भरे ट्रक सड़क पर खड़े हैं और पिछले दो दिन से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। एक दो ट्रक ऐसे भी हैं जो औरैया जनपद से आए हैं। ट्रक अनलोड न होने से क्रय केंद्रों के ठेकेदारों व केंद्र प्रभारियों को आठ सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ट्रक मालिकों को हाल्टिंग चार्ज देना पड़ रहा है। इतना ही नहीं सरकारी क्रय केंद्र के ठेकेदार का आरोप है कि अपना गेहूं पास करवाने के लिए उन्हें 500 रुपए प्रति ट्रक एफसीआई के अधिकारियों को सुविधाशुल्क देना पड़ता है जबकि अनलोडिंग करने वाले पल्लेदारों को दो हजार से बाइस सौ रुपए तक देने पड़ते हैं। इन डेली वेजेज पल्लेदारों को 171 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से एफसीआई से मानदेय मिलता है। एफसीआई के संबंधित अधिकारियों व पल्लेदार यूनियन के अध्यक्ष अनिल कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
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एफसाई के गोदाम में व कार्यालय के बाहर सड़क पर गेहूं के बोरों से लदे ट्रकों की लंबी लाइन लगी है। पूछने पर ट्रक चालक मुन्ना, पप्पू, रहीस, उसमान आदि बताते हैं कि वे पिछले दो दिन से अपनी बारी के इंतजार में खड़े हैं। चालकों और सरकारी क्रय केंद्रों के ठेकेदारों का आरोप है कि पल्लेदार 2200 रुपए देने वालों का ही ट्रक पहले अनलोड करते हैं। सुविधाशुल्क न देने वालों को खड़ा रखते हैं। औरैया से ट्रक लेकर आया पप्पू यादव बताता है कि वह पिछली 2 जून से यहां खड़ा है। 2000 रुपए ने देने की वजह से उसका ट्रक अनलोड नहीं किया जा रहा है। ट्रक चालक व सरकारी क्रय केंद्रों के कुछ ठेकेदार यह भी आरोप लगाते हैं कि गेहूं को पास कराने के लिए संबंधित एफसीआई अधिकारी को 500 रुपए प्रति ट्रक सुविधा शुल्क देना होता है। बरना गेहूं से भरा ट्रक फेल हो जाता है।

इस बाबत एफसीआई के प्रबंधक गुड्स नियंत्रण सुरेंद्र सिंह राकेश तथा क्वालिटी इंस्पेक्टर बृजेश कुमार इन आरोपों को बकबास बताते हुए कहते हैं कि हम प्रत्येक ट्रक में परखी लगाकर गेहूं निकालते हैं। अच्छी तरह मिलाकर फिर उसका 20 ग्राम अलग से निकालकर छह तरह से जांच करते हैं। गेहूं में लाही, मिट्टी, लकड़ी आदि की जांच करते हैं। जिस गेहूं में दो प्रतिशत से ज्यादा मिट्टी, लाही आदि निकली तो हम उस ट्रक को फेल कर देते हैं और उसे वापस कर देते हैं।
एफसीआई के पल्लेदार यूनियन के अध्यक्ष अनिल कुमार कहते हैं कि हमारे यहां मात्र 40 पल्लेदार हैं काम ज्यादा है। यदि पल्लेदारों की संख्या बढ़ाकर 160 कर दी जाए तो फिर दो दिन गेहूं से भरे ट्रकों के खड़े होने की समस्य कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि जिसका काम नहीं होता है तो वह तो आरोप लगाता है। काम हो जाने के बाद कोई खुश होकर पल्लेदारों को चाय, ठंडा पिला दे तो बात अलग है, हम उससे सुविधा शुल्क नहीं लेते हैं।

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