इनके संकल्प से सूरज भी हुआ पस्त

Jalaun Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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मीगनी(जालौन)। यदि कभी बुंदेलखंड की ओर जाना हो तो जालौन की माधौगढ़ तहसील के गांव मीगनी जरूर जाएं। जब पूरा बुंदेलखंड सूरज की आग बरसाती गरमी के आगे हार मान बैठा है, तब मीगनी गांव में नाले किनारे खड़े 25 हजार वृक्ष तापमान को आठ से दस डिग्री तक कम कर रहे हैं। केवल एक व्यक्ति माता प्रसाद तिवारी के संकल्प के आगे सूरज यहां बेबस नजर आता है। घने वृक्षों की छाया तोड़कर धरती तक पहुंचने के लिए सूरज यहां संघर्ष करता दिखता है।
प्रकृति प्रेमी माताप्रसाद तिवारी क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गए हैं। अपनी जीवटता के बल पर 13 साल में उन्होंने सूखे नाले के दोनों ओर सवा किलोमीटर तक एक ऐसा घना बाग लगाया है जिसमें 80 हजार पौधे लगाए थे। इनमें से 25 हजार पौधे वृक्ष का रूप ले चुके हैं। इनमें करीब दस हजार फलदार वृक्ष हैं। एमए पास माता प्रसाद के लिए पर्यावरण सबसे महत्वपूर्ण है। वर्ष 1999 में उन्होंने ग्राम मीगनी में अपनी ढाई एकड़ जमीन के पास सूखे नाले के दोनों ओर पौधे लगाने शुरु किए और वर्ष 2012 तक वह कुल अस्सी हजार पौधे लगा चुके हैं। साल 2007 से इसी घने बाग में वृक्षों के नीचे अपनी एक कुटिया बनाकर रह रहे हैं। इन पौधों में आम, अमरुद, मुसम्मी, पपीता, आंवला, नीबू, करौंदा के अलावा कटहल, नीम, बरगद, कदम, पीपल, पाखर, इमली, जामुन, गुलाब, कनेर, तुलसी के हजारों पौधे हैं। श्री तिवारी ने बताया कि यह बरसाती नाला जो गर्मियों में सूख जाता है, के दोनों किनारों की ओर करीब सवा किलोमीटर लंबा बाग विकसित किया है। पहले यह जमीन ऊबड़ खाबड़ थी जिससे पौधों में सिंचाई के लिए बड़ी समस्या रहती थी। उन्होंने एक कुंआ वहां पर खुदवाया और पंपिंग सैट भी लगवा लिया। इसी तरह दूसरे किनारे पर भी एक कुआं खोदा। इन्हीं से वह पौधों की सिंचाई करते हैं और वहीं बाग में रहते हैं।
माता प्रसाद तिवारी ने आज तक किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्था से कोई अनुदान नहीं लिया है। उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल ने पांच हजार रुपए का नगद पुरुस्कार दिया था। इसी तरह सामाजिक संस्था परमार्थ ने उन्हें कुए में पंपिंग सैट लगवाने के लिए सहयोग किया था। उनका सम्मान प्रमुख समाजसेवी संस्था अच्छे लोगों का वृहद परिवार ने भी एक समारोह में उन्हें सम्मानित किया था।
पर्यावरण प्रेमी माताप्रसाद तिवारी पिछले पांच वर्षों से अपने इसी बाग में एक मचान बनाकर उसमें चारपाई डालकर रहते हैं। वह इस बाग से डेढ़ किलोमीटर दूर अपने गृह ग्राम मीगनी में अपने घर नहीं जाते हैं। परिवारी जन जो कुछ उन्हें खाने को भिजवा देते हैं, वहीं खा लेते हैं। यदि किसी घर वाले किसी कारण वश खाना नहीं भिजवाते हैं तो बाग में लगे फल खा लेते हैैं। श्री तिवारी बताते हैं घर में पत्नी ऊषा तिवारी, दो पुत्र पवन व विनय हैं। तीन बेटियां गीता, नीता तथा कीर्ति हैं, जिनकी वह शादी कर चुके हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी बीके मिश्रा ने बताया कि जिले में कुल वनक्षेत्र 25619 है, जो जिले की कुल जमीन का छह प्रतिशत है। श्री मिश्रा ने बताया कि जिले में ऐसी फैक्ट्रियां बहुत कम है जिनकी वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है लेकिन किसान हार्वेस्टर से गेहूं की फसल काटने के बाद उनके डंठल में जो आग लगा देते हैं उससे प्रदूषण हो रहा है।

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